मुरादाबाद में प्रेग्नेंट महिलाओं पर आई आफत, एक के बाद एक पहुंच रहीं अस्पताल
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Moradabad News: मुरादाबाद में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी और कुपोषण के मामले सामने आ रहे हैं. चिकित्सकों के अनुसार बेहतर भोजन न लेने, जीवनशैली में बदलाव के कारण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी या…और पढ़ें
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां की कई महिलाएं अचानक बीमार पड़ रही हैं. अब तक इस बीमारी की सटीक वजह का पता नहीं चल पाया है. स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
यह मामला दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. चिकित्सकों के अनुसार बेहतर भोजन न लेने, जीवनशैली में बदलाव के कारण महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया और कुपोषण के मामले सामने आ रहे हैं. महिला अस्पताल में जांच के बाद ऐसी महिलाओं को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में दर्ज कर इलाज किया जा रहा है.
30 प्रतिशत महिलाएं इस बिमारी से परेशान
चिकित्सकों के अनुसार, मां ही गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत की जिम्मेदार होती है. मां कुपोषित या एनिमिक हुई. बच्चे की सेहत प्रभावित होती है. महिला अस्पताल में प्रतिदिन जांच के लिए आने वाली 120-140 महिलाओं में 30 प्रतिशत गर्भवती परेशानी से पीड़ित हैं. महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक के अनुसार, कुषोषित व एनिमिक गर्भवती महिलाओं की सेहत में अनुमान के अनुसार सुधार न होने पर प्रसव के दौरान जोखिम की आशंका होती है. दूसरी ओर, ऐसे बच्चों को जन्म के बाद बच्चों को एनआईसीयू वार्मर में रखा जाता है.
चिकित्सकों के अनुसार, मां ही गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत की जिम्मेदार होती है. मां कुपोषित या एनिमिक हुई. बच्चे की सेहत प्रभावित होती है. महिला अस्पताल में प्रतिदिन जांच के लिए आने वाली 120-140 महिलाओं में 30 प्रतिशत गर्भवती परेशानी से पीड़ित हैं. महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक के अनुसार, कुषोषित व एनिमिक गर्भवती महिलाओं की सेहत में अनुमान के अनुसार सुधार न होने पर प्रसव के दौरान जोखिम की आशंका होती है. दूसरी ओर, ऐसे बच्चों को जन्म के बाद बच्चों को एनआईसीयू वार्मर में रखा जाता है.
इन चीजों का करें सेवन
सीएमएस ने बताया कि महिलाओं को खासतौर पर गर्भवती होने पर विटामिन सी व ए वाले खाद्य पदार्थ जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, दाल, फल, अंजीर, खजूर, चना, गुड़, अंकुरित अनाज का सेवन करना चाहिए. जिससे लगातार कुपोषित में एनीमिया की शिकार हो रही महिलाओं को काफी राहत मिलेगी. इस बीमारी से उनका बचाव भी हो सकेगा.