BJP छोड़कर BSP में आते ही जितेंद्र सिंह पर दर्ज हुए 2 FIR, जानें बायोडेटा
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UP Elections 2027: कानपुर देहात की अकबरपुर-रनिया सीट से बसपा प्रत्याशी घोषित किए गए जितेंद्र सिंह ‘गुड्डन’ के खिलाफ टिकट घोषणा के तुरंत बाद एफआईआर दर्ज होने से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. पुलिस ने उनके समर्थकों के 60-70 वाहनों के काफिले पर धारा 163 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए रनिया और अकबरपुर थानों में मुकदमा दर्ज किया है. दूसरी ओर, बसपा समर्थक इस कार्रवाई को राजनीतिक दुर्भावना बताते हुए सवाल उठा रहे हैं कि जब चुनाव आचार संहिता लागू नहीं है, तो कार्यक्रम पर ऐसी पाबंदी क्यों लगाई गई. भाजपा छोड़कर हाल ही में बसपा में शामिल हुए गुड्डन को पार्टी ने अकबरपुर-रनिया विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है.
कानपुर देहात इलाके में प्रभाव रखने का दावा करते हैं जितेंद्र सिंह गुड्डन.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है. बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी जितेंद्र सिंह गुड्डन के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबर ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. भारतीय जनता पार्टी छोड़कर बसपा में शामिल हुए गुड्डन के टिकट की घोषणा के तुरंत बाद ही पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की है.
जितेंद्र सिंह गुड्डन की गाड़ियों का काफिला पर मुकदमा
यह पूरा मामला कानपुर देहात के अकबरपुर-रनिया विधानसभा क्षेत्र का है. बहुजन समाज पार्टी की ओर से आयोजित टिकट घोषणा कार्यक्रम के दौरान एक विशाल जनसभा का आयोजन हुआ, जिसमें 60 से 70 गाड़ियों का लंबा काफिला शामिल हुआ. जैसे ही यह काफिला हाईवे से होकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, पुलिस ने निषेधाज्ञा (प्रोहिबिटरी ऑर्डर्स) के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कर ली. एफआईआर दो अलग-अलग थानों – रनिया और अकबरपुर में दर्ज की गई है. पुलिस का तर्क है कि वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 (पूर्व में सीआरपीसी की धारा 144) लागू थी, जिसके तहत बिना पूर्व अनुमति के पांच से अधिक लोगों का एकत्र होना और यातायात में बाधा डालना प्रतिबंधित था.
हालांकि, इस पूरी घटना ने कई गंभीर लोकतांत्रिक और कानूनी सवाल खड़े कर दिए हैं. पहला और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या क्षेत्र में धारा 163 पहले से लागू थी? क्या वहां हाल ही में कोई उपद्रव, सांप्रदायिक तनाव या कानून-व्यवस्था का कोई बड़ा संकट पैदा हुआ था? यदि नहीं, तो क्या यह निषेधाज्ञा विशेष रूप से बसपा के राजनीतिक कार्यक्रम और प्रत्याशी के स्वागत को रोकने या प्रभावित करने के उद्देश्य से ही लागू की गई थी?
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
इस कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं कि वर्तमान में राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू नहीं है और चुनाव में अभी कई महीनों का समय शेष है. भारतीय लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल और उम्मीदवार को अपनी गतिविधियां संचालित करने, जनसंपर्क करने और शांतिपूर्ण सभाएं आयोजित करने की पूर्ण स्वतंत्रता है. ऐसे किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का जुटना, गाड़ियों का काफिला निकलना और स्वाभाविक रूप से थोड़ा-बहुत यातायात प्रभावित होना एक आम प्रक्रिया है. यदि पुलिस प्रशासन के पास धारा 163 लगाने का कोई स्वतंत्र और ठोस आधार नहीं था, तो केवल एक विपक्षी दल के कार्यक्रम के समय ऐसी पाबंदियां लागू करना सत्ता के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन की ओर इशारा करता है.
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस परिस्थिति में बहुजन समाज पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मायावती को इस पूरे घटनाक्रम का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए. बसपा के विधिक प्रकोष्ठ (लीगल सेल) को मामले की तहकीकात कर यह पता लगाना चाहिए कि क्या यह पाबंदी दुर्भावनापूर्ण थी? यदि यह साबित होता है कि धारा 163 केवल इस कार्यक्रम को लक्ष्य बनाकर लगाई गई थी, तो यह पूरी तरह ‘अल्ट्रा वायर्स’ (अधिकारतीत) और असंवैधानिक है.
कौन हैं जितेंद्र सिंह ‘गुड्डन’?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नेता जितेंद्र सिंह ‘गुड्डन’ ने भारतीय जनता पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया है. कानपुर देहात के अकबरपुर-रनिया क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले गुड्डन ने टिकट वितरण और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से नाराज होकर भाजपा से इस्तीफा दिया. बसपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें कानपुर देहात की अकबरपुर-रनिया विधानसभा सीट से अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया. यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति में अहम माना जा रहा है.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …
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