Dehati Madam: 12वीं पास देहाती मैडम…लोगों को सिखा रही फर्राटेदार इंग्लिश
Last Updated:
Dehati Madam: यशोदा लोधी, कौशांबी की हाउसवाइफ, ने YouTube पर ‘देहाती मैडम’ चैनल से इंग्लिश सिखाकर 3.87 लाख सब्सक्राइबर्स बनाए और हर महीने ₹50,000 कमाती हैं.
युटुबर यशोदा लोधी
हाइलाइट्स
- यशोदा लोधी ने YouTube चैनल से 3.87 लाख सब्सक्राइबर्स बनाए.
- यशोदा लोधी हर महीने YouTube से ₹50,000 कमाती हैं.
- यशोदा लोधी की कहानी महिलाओं के लिए प्रेरणा है.
कौशांबी: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के एक छोटे से गांव लोधन की रहने वाली यशोदा लोधी आज सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन चुकी हैं. सिर्फ 12वीं तक पढ़ी हुई एक आम हाउसवाइफ अब इंग्लिश टीचर बन चुकी हैं, और वो भी अपने गांव से, बिना किसी शहर में जाए. लोग उन्हें आज ‘देहाती मैडम’ (Dehati Madam) के नाम से जानते हैं, क्योंकि वह ठेठ देहाती अंदाज में इंग्लिश सिखाती हैं, वो भी YouTube के जरिए. गांव में बैठकर उन्होंने न सिर्फ इंग्लिश बोलना सीखा, बल्कि अब हजारों लोगों को इंग्लिश बोलना सिखा भी रही हैं.
YouTube से शुरू किया सफर
यशोदा लोधी ने खाली समय में यूट्यूब वीडियो देख-देखकर खुद अंग्रेजी बोलना सीखा. शुरुआत में उन्होंने यूट्यूब के जरिए इंग्लिश के वीडियो देखे और धीरे-धीरे अपनी अंग्रेजी सुधारने लगीं. जब उनके पति का एक सड़क दुर्घटना में पैर फ्रैक्चर हो गया और परिवार पर आर्थिक संकट में आ गया, तब उन्होंने कुछ करने की ठानी. यशोदा ने ‘देहाती मैडम’ नाम से अपना YouTube चैनल शुरू किया और आज उनके चैनल पर 3.87 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. यशोदा लोधी लगभग 2 सालों से YouTube चैनल चला रही हैं और अब उनकी मेहनत रंग ला रही है.
तीन शिफ्ट में चलाती हैं ऑनलाइन क्लास
उनकी क्लासेस दिनभर तीन शिफ्ट में चलती हैं और मज़े की बात ये है कि उनके स्टूडेंट्स में 60 से 65 साल के बुज़ुर्ग भी शामिल हैं. यशोदा का इंग्लिश सीखाने की तरीका इतना आसान और मजेदार है कि हर उम्र के लोग उनसे जुड़ रहे हैं. अब यशोदा लोधी हर महीने YouTube से करीब ₹50,000 कमाती हैं. इसी कमाई से वे अपने परिवार का खर्च चला रही हैं और पति का सहारा भी बनी हैं. जिस महिला ने कभी खुद अंग्रेज़ी से डर लगता था, अब वो गांव-देहात के सैकड़ों लोगों को अंग्रेज़ी बोलना सिखा रही हैं.
हर महिला के लिए इंस्पिरेशन
यशोदा लोधी की यह कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक तंगी या शिक्षा की कमी के चलते खुद को सीमित महसूस करती हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि हौसला हो तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है. आज वह ना सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं बल्कि अपनी शिक्षा से पूरे गांव को प्रेरित कर रही हैं.