Ground Report : डिस्पेंसरी तक नहीं…चंदौली के मुसाखांड में हाफ रहा विकास

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Ground Report : डिस्पेंसरी तक नहीं…चंदौली के मुसाखांड में हाफ रहा विकास


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Chandauli Ground Report : चंदौली के चकिया विधानसभा का मुसाखांड गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है. इस गांव में आज भी कई परिवार मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं. यहां तक पहुंचते-पहुंचते विकास की रफ्तार हांफने लगती है. ग्रामीण अजीत लोकल 18 से बताते हैं कि गांव में बिजली तो आती है, लेकिन अगर एक बार ट्रांसफार्मर खराब हो जाए तो जल्दी सुनवाई नहीं. 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. बुखार जैसी सामान्य बीमारी होने पर भी इलाज के लिए चकिया जाना पड़ता है. वशंलाल कहते हैं कि कई जगह नाली का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे बारिश के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है.

चंदौली. यूपी के चंदौली जिले के चकिया विधानसभा का ये गांव विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे नजर आता है. वनांचल क्षेत्र का मुसाखांड गांव पहाड़ी इलाके में बसा है. इस गांव में आज भी कई परिवार मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं. गांव की तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि यहां तक पहुंचते-पहुंचते विकास की रफ्तार हांफने लगती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता गांव में जरूर आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद 5 साल तक कोई सुध लेने नहीं आता. ग्रामीण अजीत ने लोकल 18 को बताया कि गांव में बिजली तो आती है, लेकिन बार-बार कटौती होती रहती है. कई बार ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है, जिसके बाद लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है. शिकायत करने के बावजूद समय पर समाधान नहीं होता. पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं है. गांव में पानी की टंकी नहीं बनी है, जिसके कारण लोगों को नाले और दूसरे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में पानी की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है.

बीच में ही पढ़ाई छूट जाती

शिक्षा के क्षेत्र में भी मुसाखांड के युवाओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने लोकल 18 से बताया 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. पहाड़ी रास्तों और परिवहन की कमी के कारण विशेष रूप से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है. कई बच्चे आर्थिक और संसाधनों की कमी के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं. दिनेश चौधरी कहते हैं कि गांव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या डिस्पेंसरी तक नहीं है. किसी व्यक्ति को बुखार जैसी सामान्य बीमारी होने पर भी इलाज के लिए चकिया या दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है. अगर किसी को हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्या हो जाए, तो समय पर इलाज मिलना मुश्किल है. ग्रामीणों की मांग है कि गांव में कम से कम एक स्वास्थ्य उपकेंद्र या डिस्पेंसरी बनाई जाए, ताकि लोगों को प्राथमिक उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सके.

सांसद-विधायक का नाम नहीं पता

ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं. इसके बाद 5 वर्षों तक गांव की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता. लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और नेताओं से समस्याएं बताई गईं, लेकिन समाधान नहीं हुआ. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव के कई बच्चों और युवाओं को अपने सांसद और विधायक का नाम तक नहीं पता, क्योंकि उनका गांव में कभी संपर्क नहीं होता. हालांकि कुछ लोगों को जिले के अधिकारियों के नाम की जानकारी जरूर है. रोहित कहते हैं कि उन्होंने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण आगे की शिक्षा नहीं ले सके. अब वह दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. गांव के अधिकांश युवा रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में मजदूरी करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में रोजगार के अवसर विकसित किए जाएं, तो पलायन पर भी रोक लग सकती है.

बरसात में सांपों का खतरा

ग्रामीण वंशलाल लोकल 18 से कहते हैं कि गांव के लोग मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हैं और धान की खेती करते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं आम हो जाती हैं. कई लोगों की सांप के काटने से मौत भी हो चुकी है. गांव की सड़कें और नालियां भी बदहाल हैं. कई जगह नाली का निर्माण अधूरा पड़ा है, जिससे बारिश के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है. मिट्टी के घरों में रहने वाले परिवारों को बारिश के मौसम में अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मुसाखांड के ग्रामीणों ने सरकार से गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क और रोजगार की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर इन बुनियादी सुविधाओं पर गंभीरता से काम किया जाए, तो वनांचल क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो सकता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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