IIT के बाद नौकरी की जगह क्यों चुनी खेती? 23 दिन में कमा चुके 1.5 लाख
Last Updated:
Organic Farming : अखिलेश मौर्या ने आईटीआई करके नौकरी को न चुनकर खीरे की ऑर्गेनिक खेती करने का फैसला किया. लोकल 18 से अखिलेश बताते हैं कि इसमें उन्हें उद्यान विभाग के जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने काफी मदद की. ये आइडिया उन्हीं का है. इस वक्त उनके खेत में 7 से 8 मजदूर प्रतिदिन हार्वेस्टिंग में लगे हैं. अब तक 23 दिन में ही करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है.
मऊ. ऑर्गेनिक खेती यूपी के किसानों की किस्मत बदल रही है. मऊ में पकड़ी के रहने वाले अखिलेश मौर्या ने आईटीआई करके नौकरी को न चुनकर खीरे की ऑर्गेनिक खेती करने का फैसला किया. आइए जानते हैं उनकी सफलता का राज. लोकल 18 से अखिलेश बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन के बाद आईटीआई किया, लेकिन आईटीआई करने के बाद नौकरी को न चुनकर ऑर्गेनिक खेती करने लगे. इसमें उन्हें उद्यान विभाग के जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता ने काफी मदद की. ये आइडिया उन्हीं का है.
लगा रखी ये 3 वैरायटी
अखिलेश के मुताबिक, विभाग के सहयोग से ऑर्गेनिक खीरा उगा रहे हैं. हालांकि शुरुआत में खीरे का दाम कम मिला. इस वक्त 7 से 8 मजदूर प्रतिदिन हार्वेस्टिंग में लगे हैं. अखिलेश मौर्या बताते हैं कि पिताजी से उन्हें प्रेरणा मिली. वर्तमान में खीरे की साईजन्ता, क्लाउच की अर्नो और दिल्ली की SIR वैरायटी लगाई है. ड्रिप लगाकर बेड विधि से मार्च महीने में पौधों को लगाया था. मई की शुरुआत से ही हार्वेस्टिंग कर रहे हैं. एक एकड़ में खेती कर रहे हैं. प्रतिदिन 7 से 8 कुंटल खीरा निकल रहा है.
शुरुआत में 14 से 15 रुपये कीमत मिली. अब 20 रुपये से अधिक कीमत मिल रही है. 1 मई से अब तक 10 टन खीरा हार्वेस्ट कर चुके हैं. एक एकड़ में ड्रिप और बेड तैयार करने समेत कुल लागत करीब 30 हजार रुपये आई है. अब तक 23 दिन में ही करीब 1.5 लाख रुपये की कमाई हो चुकी है. अखिलेश बताते हैं कि खीरे की खेती में कम लागत और मुनाफा ज्यादा है.
About the Author
प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें