MBBS डॉक्टर, 5 बार UPSC क्वालिफाई और अब SSP, UP के ‘धाकड़’ पुलिस की रोचक कहानी

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MBBS डॉक्टर, 5 बार UPSC क्वालिफाई और अब SSP, UP के ‘धाकड़’ पुलिस की रोचक कहानी


आजमगढ़: कहते हैं कि मन में कुछ बड़ा कर गुजरने की इच्छाशक्ति और इंसान के मजबूत दृढ़ संकल्प के आगे बड़ी से बड़ी कठिनाइयां और अनगिनत असफलताएं भी एक दिन नतमस्तक हो ही जाती हैं. उत्तर प्रदेश के तेज-तर्रार दबंग आईपीएस ऑफिसर, आजमगढ़ के वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज भले ही बड़े-बड़े अपराधी और माफिया उनके नाम से खौफ खाते हो, लेकिन उनकी यह पहचान सिर्फ खाकी वर्दी वाले एक सख्त अफसर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनका जीवन भी कई असफलताओं और संघर्षों के बाद भी सफल होने और कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचकर खुद को साबित करने और कुछ बड़ा कर गुजरने तक के जुनून की है.

कक्षा 5 के एंट्रेंस एग्जाम में हुए फेल
आईपीएस डॉ. अनिल कुमार का जन्म 6 दिसंबर 1981 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के अलसी सर के पास रामूजी की ढाणी नमक गांव में हुआ था. झुनझुन को फौजियों का जिला कहा जाता है, जहां की मिट्टी में बहादुर और देश प्रेम बसा हुआ है. डॉ अनिल कुमार राजस्थान के एक बेहद साधारण, संयुक्त परिवार में जन्मे थे. उनके पिता पेशे से स्कूल टीचर हुआ करते थे और उनकी मां एक कुशल गृहिणी थीं.

उनके परिवार का मुख्य आधार खेती किसानी हुआ करता था. उनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से शुरू हुई. बाद में परिवार ने उन्हें शहर के स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया, जहां कुछ ऐसा हुआ जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. स्कूल में कक्षा 5 में एडमिशन लेने के लिए उन्हें एंट्रेंस एग्जाम देना पड़ा, जिसमें वह फेल हो गए.

फिर बने स्कूल के बेस्ट स्टूडेंट
डॉक्टर अनिल कुमार के लिए असफलता की यह पहली सीढ़ी थी. इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. अपनी कमियों पर दोगुनी मेहनत करने के बाद जिस स्कूल की प्रवेश परीक्षा में डॉ. अनिल कुमार फेल हुए थे, बाद में उसी स्कूल के बेस्ट स्टूडेंट बन गए. अपनी कड़ी मेहनत के बूते उन्होंने साल 1997 में 10वीं और 1999 में 12वीं की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए राजस्थान बोर्ड की मेरिट सूची में भी अपना नाम दर्ज कराया था.

MBBS डॉक्टर के रूप के किया कार्य
अनिल कुमार फौजियों के जिले से ताल्लुक रखते थे, यही कारण था कि घर के अन्य सदस्य चाहते थे कि वह फौज में जाकर देश की सेवा करें. इसके अलावा डॉ. अनिल कुमार को शारीरिक गतिविधियों और कुश्ती जैसे खेलों का भी शुरू से ही शौक हुआ करता था. शारीरिक मजबूती और कुश्ती के अखाड़े में कभी हार ना माने का कौशल उन्हें बखूबी आता था. लेकिन अपने पिता की इच्छा के अनुरूप उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने की ठानी और 2005 में जोधपुर के संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी की. एक छोटे से गांव के एक सरकारी स्कूल से निकला हुआ छात्र देखते ही देखते एक एमबीबीएस डॉक्टर बन गया.

ऐसे शुरू हुआ UPSC का सफर
डॉक्टर की पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिल कुमार ने जूनियर डॉक्टर के रूप में कई जगहों पर अपनी सेवाएं दी उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित गुरु तेज बहादुर (GTB) और हिंदू राव अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के रूप में काम किया. इसके अलावा उन्होंने राजस्थान के झालावाड़ में भी डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दी, लेकिन डॉक्टर बन जाने के बाद अपनी इस सफलता से संतुष्ट नहीं हो रहे थे. उनके मन में कुछ बड़ा कर गुजरने की इच्छा उन्हें अंदर से अशांत किए जा रही थी.

दिल्ली के बड़े अस्पतालों में मेडिकल प्रैक्टिस के दौरान उनके साथ के कई वरिष्ठ डॉक्टरों को यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करते और फिर परीक्षा को पास करते हुए IAS-IPS बनते देखा और फिर यहीं से उस जुनून ने जन्म लिया, जिसने उत्तर प्रदेश कैडर को एक तेज तर्रार और दबंग आईपीएस ऑफिसर दिया.

2009 में पहली बार पास की यूपीएससी की परीक्षा
डॉ. अनिल कुमार के मन में यूपीएससी की तैयारी करने की प्रबल इच्छा जागृत हुई और उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस-आईपीएस बनने का सपना देखना शुरू किया. साल 2006 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. मेडिकल की नौकरी के साथ-साथ देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी करना अपने आप में बेहद कठिन था, लेकिन मजबूत इच्छा शक्ति और जुनून के आगे हर कठिनाइयां फीकी पड़ जाती हैं. डॉ. अनिल कुमार यूपीएससी के मैदान में मजबूती से डटे रहे.

डॉ. अनिल कुमार बताते हैं कि साल 2009 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली और उनका चयन इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) में हुआ. लेकिन IPS बनने के लक्ष्य के आगे उनकी यह सफलता उन्हें रास नहीं आ रही थी. उनका लक्ष्य आईपीएस बन खाकी पहनने का था. नतीजतन वह फिर से यूपीएससी की तैयारी में जुट गए.

5 बार किया UPSC क्वालीफाई
यूपीएससी के किसी एस्पायरेंट के लिए जहां एक बार परीक्षा पास यूपीएससी की परीक्षा पास करना कठिन होता है, वहीं डॉक्टर अनिल कुमार ने पांच बार यूपीएससी की परीक्षा क्वालीफाई की और आखिर में उनकी मजबूत इच्छा शक्ति और जज्बे ने उन्हें उनके लक्ष्य तक पहुंचा दिया और 2016 में उन्हें IPS की वर्दी पहनने का मौका मिला. डॉक्टर अनिल कुमार उत्तर प्रदेश कैडर में आईपीएस अधिकारी बन गए.

भाई-बहन की जोड़ी बनी IAS-IPS 
साल 2016 डॉ. अनिल कुमार के साथ-साथ उनके परिवार के लिए भी बेहद प्रेरणादायक और उपलब्धि भरा रहा. उनकी 6 साल छोटी बहन डॉक्टर मंजू ने भी अपने बड़े भाई के नक्शे कदम पर चलते हुए पहले एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और बाद में यूपीएससी की तैयारी करते हुए 2016 में ही IAS अफसर बन गईं. भाई-बहन की इस जोड़ी ने एक साथ UPSC की परीक्षा क्वालीफाई कर IAS और IPS बनने का बेमिसाल उदाहरण पेश किया.

कानपुर के बिकरू कांड में ‘एक्शन ऑन द स्पॉट’
आईपीएस की वर्दी पहनने के बाद डॉक्टर अनिल कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, उनकी बेखौफ और सख्त कार्यशैली के कारण बड़े-बड़े अपराधी उनके नाम से थर-थर कांपने लगे, लेकिन साल 2020 में कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद डॉक्टर अनिल कुमार प्रदेश के तेज-तर्रार आईपीएस ऑफिसरों की सूची में शामिल हो गए. साल 2020 में उनकी तैनाती कानपुर वेस्ट में बतौर पुलिस अधीक्षक के रूप में हुई थी. उसी दौरान हुए बिकरू कांड में गैंगस्टर विकास दुबे के गुर्गे ने 8 पुलिस कर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी. इसके बाद पूरे पुलिस महकमे में इसका आक्रोश था. इस जगह ने घटना के मात्र चार घंटे के भीतर आरोपियों को ढेर कर दिया था.

डॉ. अनिल कुमार आज आजमगढ़ जैसे संवेदनशील जिले में बतौर एसएसपी के रूप में तैनात हैं. अपने तेज तर्रार और सख्त रवैए से कानूनी व्यवस्था को मजबूती से दिशा देते हुए वह आजमगढ़ के कुख्यात अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए जिले की कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं.



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