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महराजगंज के वनटांगिया कंपार्ट 24 गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं. 12 किलोमीटर दूर बाजार जाने के लिए उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि गायब हो जाते हैं.

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बाजार जाती महिलाएं.

हाइलाइट्स

  • महराजगंज के वनटांगिया गांव में बुनियादी सुविधाओं की कमी.
  • बाजार जाने के लिए 12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है.
  • चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि गांव में नहीं आते.

महराजगंज: वर्तमान समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में फोरलेन और सिक्स लेन सड़क बिछ रही हैं लेकिन महराजगंज जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां से निकलने के लिए भी लोगों को अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के चौक रेंज के जंगलों में बसा वनटांगिया कंपार्ट 24 की स्थिति कुछ ऐसी ही है. गांव के लोगों को वहां से निकलकर नजदीकी बाजार जाने के लिए भी बहुत सारी समस्याएं होती हैं. इस गांव से नजदीकी बाजार भी 12 किलोमीटर की दूरी पर है जहां पहुंचने के लिए लोगों को प्रतिदिन संघर्ष करना पड़ता है. गांव के बहुत से लोग रोजाना 12 किलोमीटर पैदल और साइकिल से जाकर अपने जरूर का सामान खरीदते हैं. इसके साथ ही गांव की महिलाओं को अपने रोजमर्रा के जरूरी सामानों के लिए भी इसी तरह जाना पड़ता है.
महिलाएं हो जाती हैं दुर्घटनाओं की शिकार
गांव की महिला जो एक सामान ढोने वाली गाड़ी पर बैठकर यहां से 12 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद चौक में बाजार करने के लिए जिले के चौक बाजार में जा रही थी उन्होंने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि जब भी उन्हें कुछ खरीदना होता है तो ऐसे ही किसी गाड़ी को या ऑटो को पैसा देकर जाना पड़ता है. बहुत बार स्थिति ऐसी होती है कि महिलाएं रास्ता खराब होने की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार भी हो जाती हैं जिनमें उनका हाथ और पर भी टूट जाता है. गांव की महिला ने बताया कि बरसात के मौसम में कई बार ऐसा होता है कि महिलाएं पानी में डूबने लग जाती हैं इसके बाद उन्हें गांव के लोग निकाल कर लेकर आते हैं. जिस ऑटो से महिलाएं जाती हैं सिर्फ बाजार जाने के लिए उन्हें ₹50 देना पड़ता है जिससे उनके आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ता है. सड़क न होने की वजह से आने जाने के दौरान दुर्घटनाएं होना उनके दैनिक जीवन में भी शामिल हो चुका है.
चुनाव के बाद नहीं दिखाई देते हैं जनप्रतिनिधि
एक दूसरी महिला जो एक लंबे समय से इस गांव में रहती हैं उन्होंने बताया कि शुरुआती समय से और आज के समय में कुछ खास बदलाव नहीं देखने को मिला है. उन्होंने बताया कि चुनाव के समय में तो लोग आते जाते रहते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई उन्हें अपना शक्ल दिखाने भी नहीं आता है. यहां के लोग वोट डालने तो जाते हैं लेकिन विकास कार्यों को नहीं देख पाते स्थिति कुछ ऐसी है कि यहां के लोग मानसिक रूप से टूट चुके हैं और इसी स्थिति में अपना जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर. यह बहुत ही सोचने वाली बात है कि जहां देश के बड़े-बड़े नेता भारत को विश्व गुरु बनाने का दावा करते हैं तो वहीं उनके ही देश में कुछ स्थिति इतनी दयनीय है कि लोगों का जीवन भी जहन्नुम हो चुका है. प्रशासनिक अधिकारी और नेता हर बार विकास कार्यों का लोगों से दावा करते हैं और उसके बाद गांव वालों को दिखाई भी नहीं देते हैं.



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