Paddy Farming Tips : कब करें अगेती धान की कटाई? इन 4 तरीकों से करें पहचान
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Paddy Farming Tips : धान की अगेती फसल कब काटनी है, यह जानना किसानों के लिए बेहद जरूरी है. समय से कटाई न होने पर दाने झड़ने और उत्पादन घटने का खतरा रहता है. धान पकने की सही पहचान के चार आसान तरीके हैं, जिनसे किसान यह तय कर सकते हैं कि खेत में फसल कटाई के लिए तैयार है या नहीं.
शाहजहांपुर: जिन किसानों ने मोटे धान की रोपाई अगेती की थी, उनकी फसल सितंबर के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर की शुरुआत में कटाई के लिए तैयार हो जाएगी. हालांकि कटाई में किसान जल्दबाज़ी बिल्कुल भी न करें और फसल की परिपक्वता के लक्षणों को ठीक से पहचानें उसके बाद ही धान की कटाई करें. कटाई में ज्यादा देरी भी न करें, देरी से दाने झड़ने का खतरा रहता है, तो वहीं जल्दी कटाई से दानों में नमी अधिक रह जाती है, जिससे उन्हें भंडारण और बिक्री में समस्या हो सकती है. जो किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल को बेचना चाहते हैं वह धान की फसल को अच्छी तरह से पकाने के बाद ही कटाई करें.
धान की कटाई का सही समय
अगेती मोटे धान की फसल आमतौर पर रोपाई के लगभग 115 से 125 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है. कटाई का सही समय तब होता है जब खेत की 80% से 85% बालियाँ सुनहरे पीले रंग की हो जाएं. धान की कटाई के लिए सही पहचान यह है कि जब आप दाने को दबाकर देखें तो वह कड़ा हो, उसमें दूध जैसा पदार्थ न निकले, और वह पूरी तरह से भर चुका हो. कटाई के समय, ध्यान रखें कि दानों में नमी 17 से 18 प्रतिशत से ज़्यादा न हो, क्योंकि इससे भंडारण के दौरान फफूंदी लग सकती है. कटाई करते समय, दानों के झड़ने से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए, या तो कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग करें या सुबह की ओस हटने के बाद और देर शाम से पहले तेज़ हंसिया से कटाई करें.
कटाई के दौरान रखें इन बातों का ध्यान
धान की कटाई करते समय, फसल को ज़मीन से 15 सेंटीमीटर ऊपर से काटें ताकि पुआल (पराली) प्रबंधन में आसानी हो. कटाई के बाद, धान को साफ़ और पक्के स्थान पर सुखाएं दाने को 12-14 प्रतिशत नमी तक सुखाना भंडारण के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. यदि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपनी उपज बेचना चाहते हैं, तो सबसे पहले उन्हें राज्य सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. इस प्रक्रिया में उन्हें अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, बैंक पासबुक विवरण, और ज़मीन का प्रमाण (खतौनी) जैसे आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे. पंजीकरण के बाद, उन्हें सरकारी खरीद केंद्र पर धान बेचने के लिए क्रय केंद्र पर उपज लेकर जाना होगा. किसान धान की उपज को बेचने से पहले पूरी तरह से साफ और सूखा लें ताकि खरीद केंद्र पर कोई समस्या न आए.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें