Pitru Paksha 2025: पितृपक्ष में क्यों होती है यह पूजा, क्या इसके बाद स्वर्ग चले जाते हैं पूर्वज, जानिए पूरा विधि विधान
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Pitru Paksha 2025: विंध्यधाम के विद्वान पं. अनुपम महाराज ने बताया कि पितृपक्ष माह में गया पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के लिए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि गया में पिंडदान करने के बाद पितृ लोग स्वर्ग चले जाते हैं.
पं. अनुपम महाराज ने बताया कि गया जाने से पहले घर पर विशेष पूजन होता है. पूजन के बाद गांव की परिक्रमा की जाती है, जहां गांव के देवी देवताओं के यहां उपस्थिति लगती है. परिक्रमा करने के बाद गया के लिए जाया जाता है.

विंध्यधाम के विद्वान पं. अनुपम महाराज ने बताया कि पितृपक्ष माह में गया पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के लिए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि गया में पिंडदान करने के बाद पितृ लोग स्वर्ग चले जाते हैं.

पितृपक्ष के दौरान घरों में पूजन-अर्चन करने के बाद लोग गया जाते हैं. गया जाने के बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए विशेष पूजन करते हैं. हालांकि, आपको पता है कि पितृपक्ष माह में गया जाने की क्या मान्यता है. क्यों गया लोग जाते हैं.

मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से मृत पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष मिलता है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. माता और पिता की मृत्यु हो जाने के बाद लोग गया यात्रा पर जाते हैं.

पं. अनुपम महाराज ने बताया कि गया में पिंडदान करने से न सिर्फ उनके ही पूर्वज बल्कि कई पीढियां के पूर्वजों का उद्धार हो जाता है. गया को इसीलिए विशेष स्थल माना गया है.

गया को विष्णु भगवान विष्णु की नगरी माना जाता है. इसे मोक्ष की भूमि भी कही जाती है. ग्यासुर नामक एक असुर ने वरदान मांगा था कि उसकी शरीर पवित्र हो और उसके दर्शन से पाप मुक्त हो जाए. इसी के बाद यह तीर्थ स्थल बन गया.