PTR में भ्रष्टाचार-लालच का जाल… करोड़ों की फेंसिंग धरी रह गई, 10 साल में गई 67 लोगों की गई जान
Last Updated:
Pilibhit News : पीलीभीत टाइगर रिज़र्व (PTR) में करोड़ों की लागत से बनाई गई फेंसिंग ग्रामीणों और भ्रष्ट अधिकारियों की लालच के आगे बेअसर साबित हो गई. नतीजा यह हुआ कि बाघ-तेंदुओं के हमलों में 67 लोगों की जान चली ग…और पढ़ें
गौरतलब है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व का विशाल जंगल लगभग 73 हजार हेक्टयर (1 लाख 80 हजार एकड़) में फैला हुआ है. वहीं लगभग सभी इलाकों में जंगल से सटकर मानव आबादी बसी हुई है. 2014 के बाद साल दर साल बाघों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा, तो बाघों ने जंगल से सटे इलाकों में रहने की प्रवृत्ति भी विकसित कर ली. गन्ने के खेतों में बसेरा होने के चलते इन बाघों को सुगरकेन बाघ कहा जाने लगा. लेकिन यह प्रवृत्ति अपने साथ कई दुश्वारियां भी लाई, नतीजतन 2014 से लेकर अब तक मानव वन्यजीव संघर्ष के चलते 67 इंसानी जान जा चुकी हैं.
वहीं कई हिंसक जंगली जानवरों के हिस्से में उम्रकैद व मौत आई. इन परिस्थितियों के लिहाज से प्रशासन व जानकारों द्वारा ऐसे 72 गांव चिन्हित किए गए जो सबसे अधिक संवेदनशील हैं. मानव एवं जंगली जानवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बीते वर्षों में लगभग दो चरणों में लगभग 50 किलोमीटर फेंसिंग का कार्य कराया गया. शुरुआती दौर में तो इस कार्य के सकारात्मक परिणाम देखे गए. लेकिन लगभग एक वर्ष का समय बीत जाने के बाद विभागीय लोगों से सांठगांठ कर ग्रामीणों ने जगह-जगह से फेंसिंग को काट दिय है.
जून-जुलाई में 3 लोगों की मौत
बीते दिनों पीलीभीत शहर से तक़रीबन 7 किमी. दूर स्थित मेवातपुर बनकटी गांव में क्षतिग्रस्त फेंसिंग से बाहर निकली बाघिन ने 9 जून को एक ग्रामीण को अपना निवाला बनाया. जिसके बाद 17 जुलाई तक बाघिन ने 2 और लोगों को अपना निवाला बनाया. लंबी मशक़्क़त के बाद इस बाघिन को रेस्क्यू किया जा सका. इधर में लगातार हुई बरसात के बाद माला रेंज से सटे मथना ज़ब्ती और पुरैनी नगर इलाके में फेंसिंग के बाहर बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है. पूरे मामले पर अधिक जानकारी देते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि बाघ की चहलकदमी के बाद से ही स्टाफ को निगरानी बढ़ाने व फेंसिंग की मरम्मत के निर्देश दिए गए हैं.