Shahjahanpur Ground Report: 37 शौचालयों में 35 कर्मचारी… फिर भी हालात कंडम! नगर आयुक्त ने कहा- सब चकाचक
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Shahjahanpur News : शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित 37 सार्वजनिक शौचालयों में 35 कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन बावजूद इसके हालात अभी भी कंडम बने हुए हैं. हालांकि नगर आयुक्त ने दावा किया कि सभी शौचालयों की सफाई और रखरखाव चकाचक है, हालांकि आम जनता की शिकायतें जारी हैं.
शाहजहांपुर : शाहजहांपुर में सार्वजनिक शौचालयों की दयनीय हालत एक गंभीर मुद्दा है. अधिकांश स्थानों पर ये शौचालय या तो बंद पड़े हैं या गंदगी, टूटे दरवाजों और पानी की कमी के कारण इस्तेमाल के लायक नहीं हैं. सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है, जहां उन्हें खुले में या असुरक्षित तरीके से शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. ‘इज्जतघर’ कहे जाने वाले इन स्थानों पर सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की इज्जत नीलाम हो रही है. इस समस्या पर नगर निगम प्रशासन सवालों के घेरे में है. हालांकि नगर आयुक्त का कहना है कि व्यवस्थाओं को बेहतर करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है.
इज्जत नहीं, ‘बेइज्जती घर’
शहर के रहने वाले विशाल ने बताया की इज्जत घरों में अब इज्जत नहीं बल्कि बेज्जती होती है. सार्वजनिक शौचालय में स्वच्छता की कमी है, कई जगह पर शौचालय में ताले पड़े हुए है, किसी को अगर आवश्यकता होती है तो शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं है.
गेट पर लटके हैं ताले
राम खंडेलवाल का कहना है कि सरकार ने सार्वजनिक शौचालय बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दिए. अब सार्वजनिक शौचालय में गंदगी की वजह से वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है. कोई भी आदमी इन शौचालय में जाने की हिम्मत नहीं कर पाता, कई जगह पर तो सार्वजनिक शौचालय में ताले लटक रहे हैं, स्थिति बेहद खराब है.
सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब
महेश चंद्र सक्सेना ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय की स्थिति बेहद ही दयनीय है, स्वच्छता की कमी की वजह से लोग इनका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. बाहर से आने वाले लोग आवश्यकता पड़ने पर असुरक्षित स्थानों पर शौच करने को मजबूर होते हैं.
पेट्रोल पंप और रेस्टोरेंट का सहारा लेती हैं महिलाएं
कृष्ण मोहन गुप्ता ने बताया कि शाहजहांपुर में करोड़ों रुपए की लागत से सार्वजनिक शौचालय तो बने हैं लेकिन गंदगी की वजह से वह इस्तेमाल करने लायक नहीं है, कई जगह पर सार्वजनिक शौचालय में गेट नहीं तो कहीं ताले लटके हुए हैं. सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को उठानी पड़ती है, बाजार में आने वाली महिलाएं आवश्यकता पड़ने पर पेट्रोल पंप या फिर किसी रेस्टोरेंट में बने शौचालयों का सहारा लेने को मजबूर होती हैं.
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें
मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें