UP News: 1857 में यूपी का ये गांव बना था अंग्रेजों का कब्रगाह, 16 वीरों ने हंसकर दे दी थी जान
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Jaunpur News: हौज गांव जौनपुर ने 1857 की क्रांति में बालदत्त के नेतृत्व में अंग्रेज अफसरों का सामना किया, 16 वीर शहीद हुए. यहां शहीद स्मारक और 15 अगस्त को मेला आयोजित होता है.
1857 की क्रांति में हौज गांव का साहस
1857 में जब पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की लहर उठी, तब हौज गांव के जमींदार बालदत्त के दिल में भी आजादी की आग भड़क उठी. उन्होंने गांव के युवाओं को संगठित किया और अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना बनाई. पांच जून 1857 को उन्हें सूचना मिली कि जौनपुर के सभी अंग्रेज अफसर अपने सुपरवाइजर के साथ वाराणसी जा रहे हैं. बालदत्त ने 100 से अधिक क्रांतिकारियों के साथ मिलकर उन्हें रास्ते में घेर लिया.
इस गौरवगाथा को याद रखने के लिए 1986 में हौज गांव में शहीद स्मारक स्तंभ का निर्माण किया गया. जाफराबाद के तत्कालीन सपा विधायक जगदीश नारायण राय की पहल पर हर साल 15 अगस्त को यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है. इस मौके पर नेता, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि देने आते हैं.
आज भी हौज गांव का यह स्मारक और यहां की मिट्टी लोगों को यह याद दिलाती है कि आजादी केवल किताबों में लिखी कहानियों तक सीमित नहीं है. यह संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे हमारे पूर्वजों ने अपने खून से सींचा है. यहां की हवाओं में अब भी वह जज़्बा मौजूद है, जो आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है—”आजादी मिली है, तो उसकी कीमत पहचानो, क्योंकि यह किसी ने हमें उपहार में नहीं दी, बल्कि लाखों ने अपनी जान देकर अर्जित की है.”