अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवसः रानीपुर टाइगर रिजर्व को मोबाइल ऐप, अब घर बैठे करें सफारी बुकिंग
चित्रकूटः अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर चित्रकूट के रानीपुर टाइगर रिजर्व को बड़ी सौगात मिली है. मानिकपुर के पाठा क्षेत्र में स्थित रानीपुर टाइगर रिजर्व को स्थापित हुए लगभग चार वर्ष पूरे हो चुके हैं, अब इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. आज विश्व बाघ दिवस के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में रानीपुर टाइगर रिजर्व का आधिकारिक मोबाइल ऐप, वेबसाइट और नया लोगो लॉन्च किया गया है. इसके माध्यम से अब पर्यटक घर बैठे ही सफारी बुकिंग, ठहरने की व्यवस्था, भ्रमण से जुड़ी जानकारी और अन्य सुविधाओं का लाभ ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे.
वन एवं वन्यजीव संरक्षण का दिया संदेश
आप को बता दे कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण एवं जन्तु उद्यान राज्य मंत्री के.पी. मलिक, उत्तर प्रदेश वन विभाग के विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी सहित वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे है. कार्यक्रम के दौरान वन एवं वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया है. स्कूली बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण और बाघ बचाने के विषय पर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया है.
जानकारी के लिए बता दे कि आज अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के.पी. मलिक ने रानीपुर टाइगर रिजर्व के लोगो और वेबसाइट का लोकार्पण करते हुए कहा कि रानीपुर उत्तर प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व है और बुंदेलखंड की जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान समय में 205 बाघ हैं और सरकार का प्रयास है कि बेहतर संरक्षण और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराकर आने वाले वर्षों में इनकी संख्या में और वृद्धि की जाए,उनका कहना था कि बाघों की संख्या बढ़ने से प्रदेश का पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक मजबूत होगा.
रानीपुर टाइगर रिजर्व में 800 फॉरेस्ट गार्ड तैनात
वही इस संबंध में उतर प्रदेश वन विभाग के विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि रानीपुर टाइगर रिजर्व का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि टाइगर रिजर्व के विकास और संरक्षण से जुड़ी कई योजनाओं में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के माध्यम से स्वीकृति और फंडिंग की प्रक्रिया होती है, जिसके कारण कुछ कार्यों में समय लगता है, हालांकि राज्य सरकार ने भी कई योजनाएं तैयार की हैं, जिनके लिए बजट की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी.वर्तमान में रानीपुर टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए लगभग 800 फॉरेस्ट गार्ड तैनात हैं और अगस्त के अंत तक अतिरिक्त वनकर्मियों की भी तैनाती की जाएगी. इससे वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी.
बाघों की मौजूदगी पर निर्भर करता है पारिस्थितिकी तंत्र
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि किसी भी टाइगर रिजर्व की सफलता केवल बाघों की मौजूदगी से नहीं, बल्कि वहां के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करती है. जंगल, घास के मैदान, जल स्रोत और शिकार प्रजातियों की पर्याप्त उपलब्धता बाघों के लिए जरूरी होती है, उन्होंने बताया कि पन्ना टाइगर रिजर्व से वन्यजीव कॉरिडोर के माध्यम से बड़े बाघों के रानीपुर आने की संभावना है.ऐसे में विभाग का प्रयास है कि यहां उन्हें पर्याप्त भोजन, सुरक्षित आवास और अनुकूल वातावरण मिले, ताकि वे यहां स्थायी रूप से रहकर प्रजनन करें और भविष्य में रानीपुर भी देश के प्रमुख टाइगर रिजर्वों में अपनी पहचान बना सके.
वहीं राज्य मंत्री के.पी. मलिक ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं.उन्होंने सभी लोगों से एक पेड़ मां के नाम” अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान किया है. उन्होंने कहा कि बेहतर संरक्षण और जनभागीदारी के कारण प्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है.