अब जेन Alpha का फूटा गुस्सा, सड़कों पर क्‍यों उतरे बिहार, UP और राजस्‍थान के छात्र?

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अब जेन Alpha का फूटा गुस्सा, सड़कों पर क्‍यों उतरे बिहार, UP और राजस्‍थान के छात्र?


Gen Z Student Protest News: देश में छात्र राजनीति, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बार फिर युवाओं की आवाज बुलंद हो रही है. दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद अब राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में भी छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं.कहीं छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग है, कहीं स्कूलों में पानी, बिजली और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की लड़ाई तो कहीं शिक्षा व्यवस्था और जनसरोकारों के मुद्दे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन में सिर्फ 1997-2012 के बीच जन्मे युवा यानी Gen Z ही नहीं, बल्कि 2013 के बाद जन्मी नई पीढ़ी Gen Alpha भी अपनी आवाज बुलंद करती नजर आ रही है. सवाल यह है कि आखिर नई पीढ़ी इतनी मुखर क्यों हो गई है और देशभर में छात्रों के आंदोलन क्या संकेत दे रहे हैं?

जंतर-मंतर से उठी आवाज अब राज्यों तक पहुंची

हाल के दिनों में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने विभिन्न शैक्षणिक और छात्र हितों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया. इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में भी छात्र आंदोलनों की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है. राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में हुए हालिया प्रदर्शन बताते हैं कि अब छात्र केवल परीक्षा या रिजल्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी खुलकर आवाज उठा रहे हैं.

राजस्थान यूनिवर्सिटी: छात्रसंघ चुनाव के लिए भूख हड़ताल

जयपुर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी के एलएलएम द्वितीय वर्ष के छात्र शुभम रेवार पिछले कई दिनों से छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग खोलने की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे.एक स्‍टूडेंट शुभम ने एक अखबार से बातचीत में कहा कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं को लोकतंत्र और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर देते हैं. उनका यह भी कहना था कि यदि विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा का विभाग नहीं खुलेगा तो राज्य की भाषा और संस्कृति को नुकसान होगा.भूख हड़ताल के आठवें दिन पुलिस ने उनकी बिगड़ती तबीयत का हवाला देते हुए उन्हें जबरन अस्पताल पहुंचा दिया. इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच काफी तनाव भी देखने को मिला. एंबुलेंस में ले जाए जाने के दौरान उनके समर्थक एंबुलेंस के ऊपर चढ़ गए ताकि उन्हें वहां से ले जाने से रोका जा सके.

अस्पताल से भी जारी रखने का ऐलान

एसएमएस अस्पताल से शुभम रेवार ने साफ कहा कि उनका अनशन खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने लिखित रूप से प्रशासन को बताया कि जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होंगे और विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग नहीं खुलेगा तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए घरों से बाहर निकले. उनके मुताबिक Gen Z ने दिखा दिया है कि अगर युवा ठान लें तो बदलाव संभव है.

छात्र संगठनों का मिला समर्थन

शुभम रेवार के आंदोलन को धीरे-धीरे राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कई नेताओं ने उनका समर्थन किया.एनएसयूआई और एबीवीपी जैसे एक-दूसरे के विरोधी छात्र संगठन भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग पर एक मंच पर नजर आए. निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी, कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर और कई अन्य नेताओं ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया.

जंतर-मंतर की घटना का असर भी दिखा

राजस्थान में ही एनएसयूआई से जुड़े तीन छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए. उन्होंने छात्रसंघ चुनाव बहाल करने के साथ-साथ जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में भी प्रदर्शन किया.उनका आरोप था कि छात्रों के साथ सख्ती की गई और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश हुई.

स्कूल में पानी, बिजली और बेंच के लिए छात्रों का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के किशनपुर कस्बे में सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राएं भी सड़क पर उतर आए. लगभग 1800 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल में छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीने का साफ पानी, साफ शौचालय, बिजली, पंखे और पर्याप्त बेंच जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.इन समस्याओं से परेशान छात्रों ने स्कूल गेट के बाहर प्रदर्शन किया और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचा.

निरीक्षण के बाद प्रशासन ने दिए सुधार के निर्देश

प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) मौके पर पहुंचे और पूरे स्कूल का निरीक्षण किया.निरीक्षण के दौरान उन्होंने जिन कमरों में पंखे नहीं हैं वहां पंखे लगाने, छात्रों के लिए आरओ प्लांट लगाने, खेल मैदान की सफाई कराने और जहां बेंच कम हैं वहां जल्द व्यवस्था करने के निर्देश दिए. प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि छात्रों को जल्द सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

गया में विशाल छात्र मार्च

बिहार के गया शहर में भी बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतरे. गया कॉलेज से शुरू हुआ यह मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा.छात्रों ने शिक्षा, भ्रष्टाचार और अन्य जनसरोकारों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और स्वयं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तथा नगर पुलिस अधीक्षक ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की.

छात्रों का आरोप-लंबे आंदोलन के बाद भी नहीं सुनी गई बात

प्रदर्शन में शामिल छात्र नेता अभिषेक कुमार ने कहा कि छात्र पिछले करीब 20 दिनों से धरना और अनशन कर रहे थे लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों को भी आंदोलन का हिस्सा बताया हालांकि इन बयानों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

आखिर क्या कहती है नई पीढ़ी?

इन तीनों राज्यों के आंदोलनों को देखें तो मांगें अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन एक बात समान दिखाई देती है. नई पीढ़ी अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहना चाहती.छात्र लोकतांत्रिक अधिकार, बेहतर शिक्षा व्यवस्था, बुनियादी सुविधाएं और अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर आवाज उठा रहे हैं.राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव और भाषा की मांग है, उत्तर प्रदेश में स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की लड़ाई है जबकि बिहार में शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर छात्र सड़क पर हैं.

Gen Z के साथ अब Gen Alpha भी हो रही सक्रिय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौर केवल Gen Z का नहीं रह गया है.स्कूलों में पढ़ने वाली Gen Alpha भी अब अपने अधिकारों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रही है.फतेहपुर जैसे स्कूलों में छोटे छात्र-छात्राओं का सुविधाओं के लिए प्रदर्शन करना इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है.नई पीढ़ी अब सवाल पूछ रही है, अपनी बात खुलकर रख रही है और जरूरत पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी दर्ज करा रही है.

क्या बदल रही है छात्र राजनीति?

देशभर में हो रहे ये आंदोलन बताते हैं कि आज का छात्र केवल डिग्री लेने तक सीमित नहीं रहना चाहता. वह बेहतर शिक्षा, पारदर्शिता, सुरक्षित कैंपस, बुनियादी सुविधाएं और अपनी आवाज को सुने जाने की मांग कर रहा है.जंतर-मंतर से लेकर जयपुर, गया और फतेहपुर तक उठ रही ये आवाजें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में शिक्षा और छात्र हितों से जुड़े मुद्दे देश की राजनीति और नीतियों के केंद्र में और मजबूती से दिखाई दे सकते हैं.



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