अब नालों में नहीं बहेगा ट्रीटेड पानी, उद्योगों, रेलवे और बिजलीघरों में होगा इस्तेमाल

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अब नालों में नहीं बहेगा ट्रीटेड पानी, उद्योगों, रेलवे और बिजलीघरों में होगा इस्तेमाल


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UP Treated Water Policy : पीने की पानी की किल्लत दूर करने और जमीन के पानी (भूजल) को खत्म होने से बचाने के लिए योगी सरकार ने कमर कस ली है. वह एक बड़े प्लान पर काम कर रहे हैं. इसके तहत बिजली घर से लेकर रेलवे, फैक्ट्रियों तक साफ किए गए सीवेज के पानी (ट्रीटेड वॉटर) का उपयोग होगा. अगर यह योजना कामयाब रही, तो रोजाना कई लीटर पीने का पानी बर्बाद होने से बच जाएगा.

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रेलवे, बिजली घरों में पहुंचेगा साफ सीवेज का पानी. (एआई तस्वीर)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले साफ किए गए (ट्रीटेड) पानी का बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल करेगी. अब तक यह पानी नालों और नदियों में बहा दिया जाता था, लेकिन अब इसका उपयोग उद्योगों, रेलवे, बिजलीघरों, कृषि और अन्य गैर-पेयजल जरूरतों के लिए किया जाएगा. इसके लिए सभी सरकारी विभागों को अपनी कार्ययोजना में ट्रीटेड वॉटर के इस्तेमाल को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.

भूजल बचाने पर जोर
सरकार का कहना है कि प्रदेश में भूजल पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. वहीं, हर दिन लाखों लीटर ट्रीटेड पानी बिना उपयोग के बह जाता है. ऐसे में इस पानी का दोबारा इस्तेमाल कर भूजल पर निर्भरता कम की जाएगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा. इस संबंध में मुख्य सचिव एसपी गोयल ने सभी संबंधित विभागों के साथ बैठक कर जरूरी निर्देश दिए हैं.

GIS मैप से तय होगी कहां होगा इस्तेमाल
सरकार सभी एसटीपी और उन जगहों का जीआईएस (Geographic Information System) आधारित नक्शा तैयार करेगी, जहां ट्रीटेड पानी का उपयोग किया जा सकता है. राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) पहले चरण में प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों के लिए शहर स्तर की कार्ययोजना तैयार करेगा. इसके अलावा राज्य और जिला स्तर पर समितियां बनाई जाएंगी, जो इस योजना की निगरानी करेंगी.

रेलवे और उद्योगों को मिलेगा फायदा
रेलवे ने प्रयागराज जंक्शन, रेलगांव और सूबेदारगंज स्टेशनों पर गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए ट्रीटेड पानी इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है. वाराणसी, आगरा और प्रयागराज में पुनः उपयोग की योजनाएं तैयार हो चुकी हैं, जबकि कानपुर की योजना पर काम चल रहा है. वहीं राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के ‘गंगा पल्स’ पोर्टल के जरिए हर एसटीपी की निगरानी की जाएगी. इस पोर्टल पर हर 10 मिनट में पानी की गुणवत्ता का डेटा अपडेट होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल तय मानकों के अनुरूप पानी का ही उपयोग हो.

उद्योगों में सबसे ज्यादा होगा इस्तेमाल
सरकार की नई नीति में उद्योगों में ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. इसके अलावा रेलवे, ऊर्जा, कृषि, सड़क परिवहन और विमानन जैसे विभागों को भी इसे अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.

नोएडा और दादरी बने मिसाल
नोएडा में रोज उपलब्ध 260 एमएलडी ट्रीटेड पानी में से 120 एमएलडी का पुनः उपयोग किया जा रहा है, जबकि 140 एमएलडी पानी हिंडन नदी में छोड़ा जा रहा है. वहीं दादरी थर्मल पावर प्लांट में 80 एमएलडी ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल की तैयारी चल रही है. सरकार राजधानी लखनऊ के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क को दौलतगंज एसटीपी से 22.5 एमएलडी और वाराणसी के पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क को रमना एसटीपी से 10 एमएलडी ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम कर रही है. इससे उद्योगों में स्वच्छ जल की खपत कम होगी और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…

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