आंधी से आम की फसल बचाने के लिए रामपुर के किसानों का देसी जुगाड़
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रामपुर में आम के मौसम के दौरान आंधी-तूफान से होने वाले नुकसान से बचने के लिए किसान आज भी पारंपरिक देसी उपाय अपनाते हैं. झाड़ू दबाने और बागों के चारों ओर ऊंचे पेड़ लगाने जैसी पुरानी तकनीकों को वे अनुभव के आधार पर प्रभावी मानते हैं, जो कई बार फसल को नुकसान से बचाने में मददगार साबित होती हैं.
रामपुर. आम का सीजन आते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता आंधी-तूफान को लेकर होती है, हर साल जैसे ही काल बैसाखी जैसी तेज आंधियां चलती हैं पेड़ों पर लगे कच्चे आम बड़ी संख्या में टूटकर गिर जाते हैं. इससे सीधे-सीधे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि जितने आम जमीन पर गिरते हैं उतनी ही कम कमाई होती है. इसी नुकसान से बचने के लिए यहां के किसान आज भी पुराने देसी तरीके अपना रहे हैं. रामपुर के बागवान राहत जान बताते हैं कि जब भी आंधी आने के आसार होते है तो वे सींक वाली झाड़ू को एक पत्थर के नीचे दबा देते हैं उनका कहना है कि यह तरीका उन्होंने अपने बुजुर्गों से सीखा है और पिछले 28 सालों से लगातार अपना रहे हैं. उनकी मान्यता है कि इससे आंधी का रुख बदल जाता है और बाग में नुकसान कम होता है क्योंकि झाड़ू दबाने से आंधी का असर कम हो जाता है और पेड़ों से आम कम गिरते हैं.
बागों के चारों तरफ ऊंचे पेड़ लगाने की परंपरा भी पुरानी
गांव के बुजुर्गों का भी यही मानना है कि ये कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि पुराने समय का अनुभव है .पहले के लोग मौसम को देखकर, हवा के रुख को समझकर ऐसे उपाय करते थे. सिर्फ झाड़ू दबाने का तरीका ही नहीं बल्कि बागों के चारों तरफ ऊंचे पेड़ लगाने की परंपरा भी यहां काफी पुरानी है. किसान बताते हैं कि ये पेड़ तेज हवाओं को रोक लेते हैं, जिससे अंदर लगे आम के पेड़ों पर सीधा असर नहीं पड़ता. किसानों का कहना है कि आज भले ही मौसम की जानकारी मोबाइल पर मिल जाती हो लेकिन जमीन पर काम करने वाला किसान अपने अनुभव और परंपराओं को नहीं छोड़ता क्योंकि कई बार ये छोटे-छोटे देसी जुगाड़ बड़े नुकसान से बचा लेते हैं. आज भी कई किसान इन देसी तरीकों पर भरोसा करते हैं क्योंकि ये आसान है और कई बार असरदार भी साबित होते हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें