ऐतिहासिक धरोहर! रामपुर के इस किले की हर दीवार सुनाती है नवाबी दौर की कहानियां
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Rampur News: रामपुर का किला नवाबी दौर की शाही रौनक और प्रशासनिक महत्व का प्रतीक है. नवाब फैजुल्ला खान ने 1774 में इसकी नींव रखी थी. किले की वास्तुकला भारतीय और यूरोपीय शैली का मिश्रण है.
रामपुर: इतिहास हमेशा हमें अपनी कहानियों और धरोहरों के जरिए जुड़ने का मौका देता है. हर शहर की पहचान वहां की अनोखी संस्कृति और वास्तुकला से बनती है. ऐसे ही एक धरोहर है रामपुर का किला, जो शहर के बीच खड़ा, सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढेर नहीं बल्कि नवाबी दौर की शाही रौनक और प्रशासनिक महत्व का प्रतीक है. यह किला न केवल शाही दरबारों और संगीत की महफ़िलों का साक्षी रहा है, बल्कि यहां की दीवारें सदियों पुरानी कहानियों को आज भी जीवित रखती हैं.
किले की अनोखी वास्तुकला
रामपुर किले के अंदर मच्छी भवन की बारीक नक्काशी, रंग महल की सुरभरी रागिनी और हामिद मंज़िल की सादगी हर कोने में इतिहास की गूंज सुनाती है. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज, रुहेलखंड चैप्टर के सह-संयोजक काशिफ खान बताते हैं कि किले की नींव 7 अक्तूबर 1774 को नवाब फैजुल्ला खान ने रखी थी.
समय के साथ नवाब हामिद अली खान ने ब्रिटिश इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट की मदद से किले को नया रूप दिया. इस दौरान हामिद मंज़िल, दरबार हॉल और इमामबाड़ा का निर्माण हुआ. राइट ने किले की मरम्मत के साथ इसे भव्य रूप भी दिया.
सांस्कृतिक धरोहर और शहर की पहचान
रामपुर किला केवल इमारत नहीं बल्कि शहर की आत्मा का हिस्सा है. इसकी दीवारें नवाबी तहज़ीब और संस्कृति को संजोए हुए हैं. रजा लाइब्रेरी जैसी विश्व प्रसिद्ध धरोहर भी इसी किले की गोद में पनपी. यही वजह है कि यह किला इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखता है.
रामपुर किला केवल इमारत नहीं बल्कि शहर की आत्मा का हिस्सा है. इसकी दीवारें नवाबी तहज़ीब और संस्कृति को संजोए हुए हैं. रजा लाइब्रेरी जैसी विश्व प्रसिद्ध धरोहर भी इसी किले की गोद में पनपी. यही वजह है कि यह किला इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखता है.
समय के थपेड़ों ने किले को कमजोर कर दिया है. दीवारों पर दरारें, जर्जर बुर्ज और टूटते हिस्से इसके संरक्षित न होने की चेतावनी देते हैं. अगर समय रहते इसे संरक्षित नहीं किया गया तो सदियों पुरानी यह धरोहर धीरे-धीरे अपनी चमक खो सकती है.
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