कम जगहों में उगाएं ये 8 सब्जियां, जानें लहसुन से पालक तक की टॉप किस्में, पैदावार देख जल उठेंगे पड़ोसी
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Top 8 Farming Ideas : घर के बागीचे या खाली पड़ी जमीन में सब्जियां लगा दी जाएं तो इन्हें खरीदने के लिए बाहर नहीं जाना होगा. साइड बिजनेस के तौर पर भी इसे उगा सकते हैं. इसकी खेती करने वाले किसानों के अच्छे दिन आने से कोई रोक नहीं सकता. किसान भाई कम पैसों में मोटा मुनाफा कमा सकते हैं. ज्यादा झंझट भी नहीं है.
अगर आप भी कम जगह में लहसुन, आलू, करेला, टमाटर, मूली, गाजर और गोभी आदि उगाना चाहते हैं तो ये ट्रिक काम आ सकती है. कम जमीन में पैदावार के लिए कुछ किस्में खास हैं. आइये जानते हैं.

अगर आप लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो मल्चिंग या बेड विधि से उगा सकते हैं. इस विधि को पॉलिथीन विधि भी कहते हैं. मिट्टी का बेड बनाने के बाद उसे प्लास्टिक से ढक दिया जाता है. यह जल निकासी और खरपतवार से बचाते हैं. एग्री फाउंड पार्वती, जमुना-3 और जमुना-4 सफेद किस्में किसानों के लिए फायदेमंद हैं.

कम जमीन में आलू की खेती करने के लिए मेड या क्यारी विधि सही है. बीज के छोटे टुकड़ों को मेड या क्यारी पर लगा दें. अच्छी जल निकासी रखें. दोमट या बलुई मिट्टी हो तो पैदावार ज्यादा होती है. कुफरी, पुखराज, कुफरी बहार, कुफरी सिंदूरी यदि वैरायटी की खेती करें. यह बेहद लाभदायक हैं.

करेला की खेती के लिए मचान विधि को बेहतर माना गया है. मचान विधि को बांस विधि भी कहते हैं. मिट्टी भुरभुरी करने के बाद पंक्ति में 40 से 45 पौधे लगा दें. इससे कम जमीन में अधिक पैदावार होती है. इसकी बारह मासी, काशी हरित और काशी उर्वशी वैरायटी बेहतर मानी जाती है.

कम जमीन में टमाटर की खेती करने के लिए समतल जमीन बेहतर है. रोपाई के लिए पन्नी के साथ गोबर खाद का प्रयोग करें. इससे ज्यादा पैदावार होती है. संकर किस्में, पूसा शीतल और पूसा गौरव जैसी वैरायटी किसानों के लिए फायदेमंद हैं.

कम जमीन के साथ अगर बालू और दोमट मिट्टी हो तो कम समय में ही मूली का बेहतर उत्पादन पाया जा सकता है. खेती के अनुसार, खाद का प्रयोग करने से फायदा होता है. बहुत ज्यादा पानी नहीं रुके. इससे फसल खराब नहीं होगी. पूसा चेतकी, जापानी वाइट जैसी वैरायटी अच्छी मानी जाती है.

गाजर की खेती के लिए गहरी और भुरभुरी जमीन उपयुक्त है. अगर जमीन में कंकड़ और पत्थर हो तो निकाल देना चाहिए. बीज को एक सेंटीमीटर से ज्यादा गहराई में बोना चाहिए. रुधिरा और सोना वैरायटी को उम्दा माना जाता है.

गोभी की खेती के लिए दोमट मिट्टी अनुकूल है. दो से तीन बार जुताई के बाद अच्छे से बुआई कर लें. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश संतुलित मात्रा में मिला लें. 40-45×45-50 सेंटीमीटर पर रोपाई करें. पूसा, एक्मे, इम्प्रूव्ड डबल किंग आदि वैरायटी को पॉलीबैग और गमलों में लगा सकते हैं.

शलजम की बुआई के लिए ठंडी जलवायु और दोमट मिट्टी को उपयुक्त माना गया है. 10-15 सेमी पर बुआई करें. खरपतवार और कीट नियंत्रण के लिए प्रबंधन करना चाहिए. श्वेती, टरनिप एल जैसी वैराइटी उपयुक्त है.