कानपुर के सीएसजेएमयू ने बनाया मेंटल स्ट्रेस थर्मामीटर, पता चलेगा युवाओं का तनाव

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कानपुर के सीएसजेएमयू ने बनाया मेंटल स्ट्रेस थर्मामीटर, पता चलेगा युवाओं का तनाव


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कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर जनरल एंग्जायटी स्केल विकसित की है. यह स्केल खास तौर पर 17 से 25 साल के युवाओं के लिए तैयार की गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ यह नहीं बताती कि छात्र तनाव में है, बल्कि यह भी बताती है कि उसकी चिंता पढ़ाई, भावनाओं, सामाजिक माहौल, ज्यादा सोचने या भविष्य को लेकर है.

कानपुर: आज के समय में पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर की चिंता और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने बड़ी संख्या में युवाओं को तनाव और एंग्जायटी की ओर धकेल दिया है. कई बार छात्र अपनी परेशानी किसी से कह भी नहीं पाते और धीरे-धीरे मानसिक दबाव बढ़ता जाता है. ऐसे में छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) ने युवाओं के लिए एक बड़ी पहल की है. विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना तैयार किया है, जो कुछ ही मिनटों में यह बता देगा कि कोई छात्र किस तरह की चिंता या तनाव से गुजर रहा है.

छात्र की चिंता को बताता है

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर जनरल एंग्जायटी स्केल विकसित की है. यह स्केल खास तौर पर 17 से 25 साल के युवाओं के लिए तैयार की गई है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ यह नहीं बताती कि छात्र तनाव में है, बल्कि यह भी बताती है कि उसकी चिंता पढ़ाई, भावनाओं, सामाजिक माहौल, ज्यादा सोचने या भविष्य को लेकर है.

800 छात्रों पर हुआ परीक्षण, सिर्फ 20 मिनट में मिल जाएगा रिजल्ट

इस स्केल को तैयार करने से पहले शोधकर्ताओं ने 65 सवाल बनाए थे. विशेषज्ञों की सलाह के बाद इन्हें घटाकर 35 सवाल कर दिया गया. इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया. यह फाइव-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है, जिसमें ‘पूर्णतः सहमत’ से लेकर ‘पूर्णतः असहमत’ तक विकल्प दिए गए हैं. इसे पूरा करने में केवल 18 से 20 मिनट लगते हैं और इसे किसी एक छात्र या पूरे समूह पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है.

डॉ. विमल सिंह ने बताया कि इस स्केल की विश्वसनीयता 0.94 है, जो इसे बेहद भरोसेमंद बनाती है. इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाले जीएडी-7 स्केल से भी जांचा गया, जिसमें अच्छे परिणाम मिले. इस वजह से इसे देश की प्रतिष्ठित संस्था ‘प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड’ ने प्रकाशित भी किया है.इस स्केल की मदद से अब शिक्षक, काउंसलर और मनोवैज्ञानिक कुछ ही मिनटों में यह समझ सकेंगे कि किसी छात्र को किस तरह की परेशानी ज्यादा है. इसके बाद जरूरत के अनुसार समय पर काउंसिलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद दी जा सकेगी.

शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे कई युवाओं को गंभीर मानसिक समस्याओं तक पहुंचने से पहले ही मदद मिल सकेगी.कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि सीएसजेएमयू हमेशा शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे रहा है. युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसका लाभ आने वाले समय में देशभर के शिक्षण संस्थानों और लाखों छात्र-छात्राओं को मिलेगा.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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