‘किसी सहारे की जरूरत नहीं’, गाजीपुर के मंजूर अहमद 75 साल की उम्र में कर रहे ऐसा काम

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‘किसी सहारे की जरूरत नहीं’, गाजीपुर के मंजूर अहमद 75 साल की उम्र में कर रहे ऐसा काम


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Ghazipur ki local news : गाजीपुर में 75 साल के मंजूर अहमद बीते 34 साल से भुट्टा बेच रहे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर भी वे खुद कोयला सुलगाकर सैकड़ों भुट्टे रोज भूनते हैं. कभी 1 रुपये से शुरू हुआ उनका सफर आज 20 रुपये के भुट्टे तक पहुंच चुका है. उनके भुट्टे का दीवाना कौन नहीं. लोकल 18 से मंजूर बताते हैं कि घर चलाने की मजबूरी ने उन्हें इस राह पर ला खड़ा किया. कचहरी के पास से सफर शुरू करने वाले मंजूर का अब शास्त्री नगर नया अड्डा बन चुका है. मंजूर कहते हैं कि अगर दुकानदारी ठीक से चल जाए तो रोज कम से कम डेढ़ सौ भुट्टा आराम से बिक जाता.

गाजीपुर. शाम ढलते ही गाजीपुर के शास्त्री नगर में एक ठेले पर कोयले की धीमी आंच सुलग उठती है. इसके साथ ही हवा में भुनते हुए भुट्टों की सोंधी महक घुलने लगती है, जिसके पीछे खड़े नजर आते हैं 75 साल के मंजूर अहमद. यह सिर्फ एक ठेला नहीं, बल्कि उनकी 34 साल की कड़ी मेहनत और संघर्ष का जीवंत दस्तावेज है. लोकल 18 से मंजूर अहमद बताते हैं कि उन्होंने कभी यह काम शौक के लिए नहीं चुना था, बल्कि घर चलाने की मजबूरी ने उन्हें इस राह पर ला खड़ा किया. वक्त के साथ यही मजबूरी अब उनकी मुख्य पहचान बन चुकी है. जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब एक भुट्टा महज एक रुपये में बिकता था, जो अब बढ़कर बीस रुपये तक पहुंच चुका है. उनका ठिकाना भी बदला. कचहरी के पास से सफर शुरू करने वाले मंजूर अहमद का पिछले कुछ साल से अब शास्त्री नगर नया अड्डा बन चुका है, जहां गाजीपुर भर से लोग स्वाद की तलाश में खिंचे चले आते हैं.

बलिया से आता माल

उनके ठेले पर बिकने वाला मक्का आम नहीं होता, बल्कि उसे विशेष तौर पर बलिया से मंगवाया जाता है. यह मक्का दो किस्मों में बंटा होता है. एक पांच गोटी दानों वाला, जो बेहद मीठा होता है. दूसरा सामान्य पूरी बाली वाला मक्का. यहां ग्राहकों के लिए छोटा भुट्टा दस रुपये और बड़ा भुट्टा बीस रुपये में मिलता है. मंजूर कहते हैं कि रोज कम से कम डेढ़ सौ भुट्टा तो बिक जाता अगर दुकानदारी ठीक से चल जाए.

हौसला मिसाल

इस उम्र में भी मंजूर अहमद के हौसले मिसाल कायम करते हैं. उन्हें अपने इस काम के लिए किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती. ठेले पर कोयला सुलगाना हो, भुट्टा भूनने हो या ग्राहकों को बेचना हो, वे हर काम अकेले करते हैं. मक्का सीजन के दौरान रोजाना उनके ठेले पर डेढ़ से दो सौ ग्राहक पहुंचते हैं.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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