कूड़े से बनाएं सोना! वर्मी कंपोस्ट से बिना खर्च बढ़ाएं पैदावार, जानिए बनाने का तरीका
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Make Organic Fertilizer at Home: आज के दौर में रासायनिक खादों के अत्यधिक प्रयोग से खेती की जमीन बंजर होती जा रही है. ऐसे में वर्मी कंपोस्ट किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है. केंचुओं की मदद से गोबर, सूखे पत्ते और घास को गलाकर तैयार की गई यह जैविक खाद पूरी तरह से प्राकृतिक और प्रदूषण मुक्त होती है. दिखने में चायपत्ती जैसी दानेदार और काली दिखने वाली यह खाद मिट्टी की ताकत वापस लौटाने की क्षमता रखती है. किसान भाई अपने घर के बेकार कूड़े-कचरे से इसे तैयार कर न केवल खेती की लागत कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी को भी कई गुना बढ़ा सकते हैं.
वर्मी कंपोस्ट एक जैविक उर्वरक है, जिसे केंचुओं की मदद से तैयार किया जाता है. जब केंचुए गोबर और कृषि अपशिष्ट जैसे सूखे पत्ते, घास को खाते हैं, तो उनके पाचन के बाद जो मल निकलता है, वही वर्मी कंपोस्ट कहलाता है. यह दिखने में चायपत्ती जैसा दानेदार और काला होता है. इसमें कोई दुर्गंध नहीं होती और यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और प्राकृतिक होता है.

साधारण खाद के मुकाबले इसमें पोषक तत्व कहीं अधिक मात्रा में होते हैं. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम का बेहतरीन संतुलन होता है. इसके अलावा इसमें सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. ये तत्व पौधों की जड़ों को मजबूती देते हैं, जिससे फसलें रोगों से लड़ने में सक्षम बनती हैं और उनकी गुणवत्ता में सुधार होता है.

वर्मी कंपोस्ट मिट्टी की संरचना में सुधार करता है. यह मिट्टी की जल धारण क्षमता को बढ़ाता है, जिससे कम सिंचाई की जरूरत पड़ती है. यह मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे जड़ों तक ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती है. इसके नियमित उपयोग से बंजर होती जमीन भी धीरे-धीरे उपजाऊ होने लगती है और मिट्टी में लाभकारी जीवाणुओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी होती है.
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रासायनिक खादें महंगी होती हैं और लंबे समय में जमीन को खराब करती हैं. इसके विपरीत, वर्मी कंपोस्ट किसान खुद घर पर बेकार पड़े कूड़े-कचरे से तैयार कर सकते हैं. इससे खाद पर होने वाला खर्च लगभग शून्य हो जाता है. साथ ही, जैविक तरीके से उगाई गई फसलों का बाजार में दाम भी अच्छा मिलता है, जिससे किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी और लागत में कमी आती है.

इसे बनाने के लिए सबसे पहले एक छायादार स्थान चुनें. वहां ईंटों की मदद से 3 फीट चौड़ा और अपनी सुविधा अनुसार लंबा बेड बनाएं. सबसे नीचे सूखी घास या भूसे की परत बिछाएं. उसके ऊपर थोड़ा पानी छिड़कें. अब इस पर 15-20 दिन पुराना गोबर डालें क्योंकि ताजा गोबर गर्म होता है जो केंचुओं को मार सकता है. बेड की ऊंचाई लगभग 2-3 फीट रखें.

गोबर भरने के बाद इसमें ‘आइसिनिया फेटिडा’ प्रजाति के केंचुए छोड़ दें. एक टन कचरे के लिए लगभग 1-2 किलो केंचुए पर्याप्त होते हैं. इसके बाद बेड को बोरी या जूट के बैग से ढक दें. समय-समय पर पानी का छिड़काव करते रहें ताकि 30% से 40% तक नमी बनी रहे. केंचुओं को अंधेरा और नमी पसंद होती है, इसलिए इन्हें तेज धूप से बचाना बहुत जरूरी है.

लगभग 60 से 70 दिनों में ऊपरी सतह पर चायपत्ती जैसी खाद दिखने लगती है. जब खाद तैयार हो जाए, तो पानी देना बंद कर दें ताकि केंचुए नीचे की परत में चले जाएं. इसके बाद ऊपरी खाद को धीरे-धीरे उतार लें और छानकर छाया में सुखा लें. बची हुई निचली परत और केंचुओं का उपयोग अगली बार नई खाद बनाने के लिए फिर से किया जा सकता है.