कौन हैं रविन्द्र कुमार, जिन्होंने देश के टॉप DM की लिस्ट में बनाई जगह, जानें इनकी कहानी

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कौन हैं रविन्द्र कुमार, जिन्होंने देश के टॉप DM की लिस्ट में बनाई जगह, जानें इनकी कहानी


DM Ravindra Kumar Success Story: किसी भी जिले के विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी जिस अधिकारी के कंधों पर होती है वह जिलाधिकारी होता है. जनता और सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाने वाला यह पद तभी सार्थक होता है. जब प्रशासन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनहित के साथ काम करे. आजमगढ़ के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने अपने कार्यों से इसी सोच को साकार किया है. यही वजह है कि प्रतिष्ठित फेम इंडिया-एशिया पोस्ट सर्वे 2026 में उन्हें देश के शीर्ष 25 जिलाधिकारियों में स्थान मिला है. सर्वेक्षण में उन्हें 862 अंक प्राप्त हुए जो सूची में सर्वोच्च स्कोर के रूप में दर्ज किया गया.

देशभर के लगभग 800 जिलों के प्रशासनिक कार्यों का मूल्यांकन कर तैयार की गई इस सूची में प्रशासनिक दक्षता, सुशासन, नवाचार, जवाबदेही, संकट प्रबंधन, जनसंवेदनशीलता और विकास कार्यों जैसे दस प्रमुख मानकों को आधार बनाया गया. रविन्द्र कुमार ने इन सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है.

खुद लोगों की समस्याएं सुनते
आजमगढ़ में उनकी पहचान एक ऐसे जिलाधिकारी के रूप में बनी है जो जनता के बीच रहकर काम करना पसंद करते हैं. कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनता दर्शन में वह स्वयं लोगों की समस्याएं सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश देते हैं. गरीब, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और वंचित वर्गों के लिए उनकी संवेदनशील कार्यशैली ने प्रशासन के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत किया है. यही कारण है कि जिले के दूर-दराज क्षेत्रों के लोग भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं.

समाज को सकारात्मक संदेश दिया
रविन्द्र कुमार ने विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है. प्रधानमंत्री के ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान के बाद उन्होंने स्वयं ई-रिक्शा से कार्यालय पहुंचकर समाज को सकारात्मक संदेश दिया. इसके अलावा जल संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है. बुलंदशहर में नीम नदी के पुनर्जीवन, झांसी में जल संरक्षण अभियानों और आजमगढ़ में तमसा नदी संरक्षण से जुड़े प्रयासों को व्यापक सराहना मिली है.

अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहते
तकनीक आधारित प्रशासन को बढ़ावा देते हुए उन्होंने डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा आधारित समीक्षा प्रणाली को मजबूत किया. वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित फील्ड विजिट और आकस्मिक निरीक्षण उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा रहे है. संकट की घड़ी में त्वरित निर्णय लेने और प्रशासनिक तंत्र को प्रभावी ढंग से संचालित करने की क्षमता भी उनकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है.

किसान परिवार से IAS बनने तक का सफर
रविन्द्र कुमार का जीवन संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी है. बिहार के बेगूसराय जिले के एक किसान परिवार में जन्मे रविन्द्र कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद रांची से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा भी उत्तीर्ण की और वर्ष 2002 में मर्चेंट नेवी में अपना करियर शुरू किया. मेहनत और प्रतिभा के बल पर 2007 में उन्हें चीफ ऑफिसर के पद पर पदोन्नति भी मिली. लेकिन उनका सपना कुछ बड़ा करने का था.

मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ी
साल 2008 में उन्होंने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़कर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और महज दो वर्षों के भीतर 2011 में अपने दूसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली. 2012 में उनकी पहली नियुक्ति सिक्किम कैडर में आईएएस अधिकारी के रूप में हुई, जहां उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए.

माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले देश के पहले IAS
प्रशासनिक उपलब्धियों के साथ-साथ रविन्द्र कुमार साहसिक अभियानों के लिए भी जाने जाते हैं. 19 मई 2013 को उन्होंने अपने साथियों के साथ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया और यह उपलब्धि हासिल करने वाले देश के पहले आईएएस अधिकारी बने. इसके बाद 23 मई 2019 को उन्होंने दूसरी बार माउंट एवरेस्ट फतह कर नया इतिहास रचा. इस दौरान उन्होंने केवल तिरंगा ही नहीं, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन और नमामि गंगे अभियान के ध्वज भी एवरेस्ट की चोटी पर फहराकर पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का संदेश दिया.

आजमगढ़ के लिए गौरव का क्षण
फेम इंडिया–एशिया पोस्ट सर्वे 2026 में शीर्ष 25 जिलाधिकारियों में स्थान और सर्वोच्च स्कोर हासिल करना केवल रविन्द्र कुमार की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे आजमगढ़ के लिए गर्व का विषय है. उनकी कार्यशैली यह साबित करती है कि संवेदनशील प्रशासन, जनसेवा के प्रति समर्पण और विकासोन्मुख सोच के माध्यम से किसी भी जिले को नई पहचान दी जा सकती है. राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान आने वाले समय में भी सुशासन और जनहित की दिशा में प्रेरणा देती रहेगी.



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