गन्ने की पत्तियों में ऐंठन और सिरके जैसी गंध? पोक्का बोइंग का हो सकता है प्रकोप

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गन्ने की पत्तियों में ऐंठन और सिरके जैसी गंध? पोक्का बोइंग का हो सकता है प्रकोप


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गन्ने की पत्तियों में ऐंठन और सिरके जैसी गंध?पोक्का बोइंग का हो सकता है प्रकोप

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Pokka boing disease in sugarcane: गन्ने में पोक्का बोइंग रोग मानसून की नमी से तेज़ी से फैलता है. पहचान के लिए ऊपरी पत्तियों में ऐंठन और सिरके जैसी गंध देखें. शुरुआती लक्षण दिखने पर प्रभावित हिस्सा काटकर पॉलिथीन में भरें और खेत से दूर 2-3 फीट गहरे गड्ढे में दबाएं. प्रकोप अधिक होने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करें। सही देखभाल और स्वच्छता से फसल सुरक्षित रखें.

गन्ने की फसल में पोक्का बोइंग (Pokkah Boeng) रोग का प्रकोप मानसून के दौरान तेजी से बढ़ता है. फफूंद (Fungus) जनित यह बीमारी समय पर नियंत्रित न की जाए, तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है. रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल के बजाय, किसान यांत्रिक यानी मैकेनिकल तरीकों और नियमित निगरानी से इस बीमारी को प्रारंभिक स्तर पर ही फैलने से रोक सकते हैं. सही पहचान, प्रभावित पौधों की कटाई और स्वच्छता प्रबंधन से बिना किसी भारी लागत के गन्ने की फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.

फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान ने बताया कि पोक्का बोइंग एक फफूंद जनित बीमारी है, जो गन्ने की पत्तियों को प्रभावित करती है. यदि बीमारी शुरुआती चरण में हो, तो प्रभावित हिस्से को काटकर पॉलिथीन में भरें और खेत से दूर 2-3 फीट गहरे गड्ढे में दबा दें. रासायनिक उपचार के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride) का छिड़काव बेहद कारगर है. बीमारी के बीजाणुओं (spores) को खत्म करने के लिए यांत्रिक और जैविक स्वच्छता सबसे सुरक्षित उपाय है.

पोक्का बोइंग रोग की पहचान
पोक्का बोइंग फफूंद से फैलने वाला एक प्रमुख रोग है. मानसून के मौसम में वातावरण में नमी और उमस के कारण इसके फैलने की संभावना सबसे अधिक होती है. इस बीमारी में गन्ने की ऊपरी पत्तियों पर ऐंठन और चूड़ीनुमा यानी घुमावदार बनावट दिखाई देने लगती है. रोग का प्रकोप बढ़ने पर प्रभावित पत्तियों और तने से सिरके जैसी गंध आने लगती है जिससे इसकी पहचान आसानी से हो जाती है.

यांत्रिक तरीके से रोकथाम की विधि
बिना किसी रासायनिक कीटनाशक के बीमारी को रोकने के लिए नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें. यदि किसी पौधे में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखें, तो प्रभावित हिस्से को पौधे से थोड़ा नीचे से काट दें. ध्यान रखें कि कटी हुई पत्तियों को सीधे खेत में न फेंकें, क्योंकि इससे फफूंद के स्पोर्स हवा और पानी के माध्यम से स्वस्थ पौधों तक फैल सकते हैं.

निस्तारण और खेत की स्वच्छता
काटे गए प्रभावित पौधों और पत्तियों को तुरंत किसी बड़ी पॉलिथीन थैली में इकट्ठा करें. इसके बाद इसे खेत से बाहर ले जाकर दो से तीन फीट गहरे गड्ढे में डालकर मिट्टी से अच्छी तरह दबा दें. इस प्रक्रिया से फफूंद खेत में दोबारा नहीं फैलती और स्वस्थ पौधों को संक्रमण से सुरक्षा मिलती है.

रासायनिक एवं बीजाणु नियंत्रण
अगर बीमारी अधिक मात्रा में फैल रही हो, तो गड्ढे में दबाते समय या खेत में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride) या कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) का छिड़काव किया जा सकता है. इससे फफूंद के बीजाणु (spores) और माइसीलियम (mycelium) पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं जिससे बीमारी का प्रसार रुक जाता है. नियमित देखभाल और यांत्रिक प्रबंधन से फसल को स्वस्थ रखा जा सकता है.

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Manish Rai

Manish Rai is a digital journalist with over 8 years of experience in regional and digital media. He is currently associated with News18 as the Local18 Uttar Pradesh Coordinator, where he works on planning, coo…

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