गोरखपुर की डिब्बे वाली दीदी संगीता पांडेय, हजारों महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
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संगीता महिलाओं को सिर्फ प्रोडक्ट बनाना ही नहीं सिखातीं, बल्कि उसकी पैकेजिंग और मार्केट वैल्यू पर भी ध्यान देती हैं. वह समय-समय पर महिलाओं की क्लास लेकर बताती हैं कि किसी प्रोडक्ट की पैकिंग किस तरह आकर्षक होनी चाहिए, ताकि ग्राहक पहली नजर में उसे पसंद करें. इस काम से जुड़ी महिलाओं की कमाई भी अलग-अलग है. कई महिलाएं करीब 10 हजार रुपये से अपने काम की शुरुआत कर रही हैं
गोरखपुरः गोरखपुर में अब महिलाओं के लिए रोजगार का मतलब सिर्फ नौकरी करना नहीं रह गया है. कई महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ अपने हुनर को कारोबार में बदलकर अच्छी कमाई कर रही हैं. ऐसी महिलाओं को बाजार से जोड़ने और उनके उत्पादों को पहचान दिलाने में गोरखपुर की ‘डिब्बे वाली दीदी’ के नाम से पहचानी जाने वाली संगीता पांडे अहम भूमिका निभा रही हैं.
खुद चलाती है डब्बे बनाने की फैक्ट्री
संगीता पांडे खुद डिब्बे बनाने की फैक्ट्री चलाती हैं और अपना कारोबार खड़ा कर चुकी हैं. अब वह दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रही हैं. उनका कहना है कि गोरखपुर की कोई महिला घर से कोई प्रोडक्ट तैयार करती है तो उसे बाजार तक पहुंचाने, बेचने और उसकी सही पैकेजिंग कराने में वह मदद करती हैं. उनके मुताबिक, अब तक हजारों महिलाओं को घर से रोजगार से जोड़ने का काम किया जा चुका है.
गोबर के दीये से लेकर जूट और टेराकोटा तक
गोरखपुर में महिलाएं घर बैठे कई तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं. कोई गोबर से आकर्षक दीये और सजावटी सामान बना रही है तो कोई जूट से अलग-अलग उपयोगी प्रोडक्ट तैयार कर रही है. वहीं, कुछ महिलाएं टेराकोटा के जरिए खूबसूरत मूर्तियां और सजावटी सामान बना रही हैं. इन उत्पादों को तैयार करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उन्हें बाजार तक पहुंचाने की होती है. संगीता पांडे इसी कड़ी को मजबूत करने का काम करती हैं. वह महिलाओं के बनाए सामान की बिक्री और मार्केटिंग में मदद करती हैं, ताकि मेहनत का सही दाम मिल सके.
10 हजार से शुरुआत, 50 हजार तक कमाई
संगीता महिलाओं को सिर्फ प्रोडक्ट बनाना ही नहीं सिखातीं, बल्कि उसकी पैकेजिंग और मार्केट वैल्यू पर भी ध्यान देती हैं. वह समय-समय पर महिलाओं की क्लास लेकर बताती हैं कि किसी प्रोडक्ट की पैकिंग किस तरह आकर्षक होनी चाहिए, ताकि ग्राहक पहली नजर में उसे पसंद करें. इस काम से जुड़ी महिलाओं की कमाई भी अलग-अलग है. कई महिलाएं करीब 10 हजार रुपये से अपने काम की शुरुआत कर रही हैं, जबकि कुछ महिलाएं महीने में 40 से 50 हजार रुपये तक कमाई कर रही हैं. यानी घर के काम के साथ शुरू किया गया छोटा कारोबार धीरे-धीरे अच्छी आमदनी का जरिया बन सकता है.
संगीता का मानना है कि, अगर महिलाओं के पास हुनर है और वह घर से कोई अच्छा प्रोडक्ट तैयार कर सकती हैं, तो बाजार की चिंता करने की जरूरत नहीं है. सही मार्गदर्शन, बेहतर पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए घर का छोटा काम भी बड़े बिजनेस में बदला जा सकता है. गोरखपुर की महिलाओं के लिए यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई राह बन रही है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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