जवाहर लाल नेहरू का दबदबा, कांग्रेस की आंधी, फिर भी गणपत सहाय ने दिया था मात

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जवाहर लाल नेहरू का दबदबा, कांग्रेस की आंधी, फिर भी गणपत सहाय ने दिया था मात


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बाबू गणपत सहाय उस समय कांग्रेस से नाराज थे. उन्होंने निर्दलीय रूप में कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की. उस दौर में चुनाव जीतना न सिर्फ सुल्तानपुर को चर्चा का केंद्र बनाया बल्कि उनकी व्यक्तिगत छवि भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के रूप में होने लगी हालांकि बाद में वे फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए.

Babu Ganpat Sahai Story: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आजादी के बाद से कई वर्षों तक देश की सत्ता पर आसीन रही. पहली लोकसभा के गठन के बाद जब देश में चुनाव हुए तो उस समय कांग्रेस पार्टी का दबदबा हुआ करता था. ऐसे में पंडित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री रहते सुल्तानपुर में भी कांग्रेस के सांसद चुने गए थे, लेकिन 1961 के उपचुनाव में सुल्तानपुर में कुछ ऐसा हुआ कि एक बार कांग्रेस को करारी शिकस्त देखने को मिली. यहां पर एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के नेता को सुल्तानपुर के स्थानीय बाबू गणपत सहाय ने चुनाव हार दिया था. आज हम जानेंगे क्या है यह किस्सा?

वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह ने कहानी के बाबत लोकल 18 से बात की. उन्होंने बताया कि भारत की आजादी के पहले स्वतंत्रता आंदोलन में कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय एकता के तौर पर नेतृत्व किया था, जो लोगों के भीतर समा गया था. इसका प्रभाव आजादी के बाद कई लोकसभा चुनाव के पंचवर्षीय में भी देखने को मिला. यह बात 1961 की है उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे. इस दौर में सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पूरे भारत पर कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था.

1961 की चुनाव की कहानी

लेकिन पंडित मदन मोहन मालवीय के पुत्र गोविंद मालवीय के 1957 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और उनका देहांत हो गया. जिसके बाद सुल्तानपुर में लोकसभा का उपचुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस ने सुल्तानपुर से के.सी. पंत को टिकट देकर मैदान में उतारा लेकिन कांग्रेस के दबदबे को शिकस्त देने वाले कांग्रेस के ही एक पूर्ण सिपाही थे जिनका नाम बाबू गणपत सहाय था.

निर्दलीय लड़ कर जीते चुनाव 
बाबू गणपत सहाय उस समय कांग्रेस से विरक्त थे और उन्होंने निर्दलीय रूप में कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की. उस दौर में चुनाव जीतना न सिर्फ सुल्तानपुर को चर्चा का केंद्र बनाया बल्कि उनकी व्यक्तिगत छवि भी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के रूप में होने लगी हालांकि बाद में वे फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए लेकिन उस समय कांग्रेस को सुल्तानपुर से हराने वाले पहले नेता थे.

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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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