जिस फूल पर दिल हार बैठती हैं महिलाएं…उसे उगाकर किसान हो रहे मालामाल…

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जिस फूल पर दिल हार बैठती हैं महिलाएं…उसे उगाकर किसान हो रहे मालामाल…


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Rajnigandha Ki Kheti: सहारनपुर के रवि सैनी रजनीगंधा फूल की खेती कर रहे हैं, जिससे उन्हें पारंपरिक खेती से कई गुना अधिक लाभ मिल रहा है. यह फूल दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी में बिकता है और विभिन्न सजावट में इस्तेमाल ह…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • रवि सैनी रजनीगंधा फूल की खेती से मालामाल हो रहे हैं.
  • रजनीगंधा फूल दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी में बिकता है.
  • रजनीगंधा फूल सजावट और वरमाला में इस्तेमाल होता है.
Rajnigandha Cultivation: सहारनपुर के किसान अब परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने में जुटे हैं. सहारनपुर के रहने वाले रवि सैनी ने रजनीगंधा फूल की खेती शुरू की है और आज वे इससे लाखों कमा रहे हैं. यह फूल सीधा सहारनपुर से दिल्ली की गाज़ीपुर मंडी तक भेजा जाता है. रजनीगंधा का इस्तेमाल खासतौर पर महिलाओं के गजरे बनाने, घर सजाने और शादियों की वरमाला तक में किया जाता है. इसकी खेती में लागत बहुत कम आती है लेकिन मुनाफा कई गुना ज्यादा होता है. रजनीगंधा ₹20 से लेकर ₹1000 किलो तक बिकता है. एक बार खेत में लगाने पर यह फूल तीन साल तक लगातार निकलता है और रोज़ाना तोड़ा जाता है.

एक बार लगाने पर 3 साल तक कमाई
किसान रवि सैनी ने बताया कि वे पिछले पांच सालों से रजनीगंधा की खेती कर रहे हैं. इसकी खुशबू सेंडलवुड से भी बेहतर होती है और दूर से ही लोगों को अपनी ओर खींचती है. रजनीगंधा को दिसंबर से फरवरी के बीच लगाया जाता है. यह अगस्त से अक्टूबर के बीच बेहतरीन फूल देता है.

रवि ने बताया कि अगर कोई किसान इसे पांच बीघा ज़मीन में लगाए तो आराम से एक क्विंटल फूल रोज निकल सकता है. उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने इसकी खेती शुरू की है, तब से पारंपरिक खेती पूरी तरह छोड़ दी है. पारंपरिक खेती में जहां केमिकल और फर्टिलाइज़र की ज़रूरत पड़ती है, वहीं रजनीगंधा सिर्फ गोबर खाद में ही शानदार फूल देता है.
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कम लागत में तगड़ा मुनाफा
इस फूल की एक खास बात यह भी है कि खेत में एक बार लगने के बाद यह तीन साल तक रोज़ फूल देता है. सूरज निकलने से पहले फूल तोड़ लिया जाता है ताकि उसकी ताज़गी बनी रहे. इसके बाद फूल मंडी में चला जाता है और कई दिनों तक तरोताजा रहता है.

रजनीगंधा फूल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल महिलाओं के बालों के गजरे बनाने में होता है. इसके अलावा यह शादियों की सजावट और वरमाला में भी खूब इस्तेमाल होता है. कम लागत, बढ़िया मुनाफा और लंबे समय तक चलने वाली खेती ने रजनीगंधा को किसानों के लिए फायदे का सौदा बना दिया है.

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