ट्रेन आते ही खुद हट जाएगा ब्रिज, छात्र का इनोवेशन जो बचाएगा हजारों जिंदगियां

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ट्रेन आते ही खुद हट जाएगा ब्रिज, छात्र का इनोवेशन जो बचाएगा हजारों जिंदगियां


महराजगंज: हम सभी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी वाहन की आवश्यकता होती है. हमारे देश में अधिकांश लोग यात्रा के लिए ट्रेन का उपयोग करते हैं. जब हम अपने दफ्तरों में काम कर रहे होते हैं या घरों में आराम कर रहे होते हैं, उस समय भी लाखों लोग ट्रेनों में सफर कर रहे होते हैं. सामान्य तौर पर कहें तो ट्रेन हमारे देश की बड़ी आबादी के जीवन का अहम हिस्सा है.

हालांकि, कई बार ट्रेन से जुड़े हादसों की खबरें भी सामने आती हैं. खासकर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने के दौरान दुर्घटनाएं होने की आशंका रहती है. इन्हीं दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए महराजगंज जिले के सिसवा क्षेत्र के आरपीआईसी स्कूल के छात्र आदर्श मिश्रा ने एक अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया है. उन्होंने सुरक्षा के दृष्टिकोण से ‘स्मार्ट ब्रिज’ नामक मॉडल बनाया है, जो रेलवे सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है.

एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक सुरक्षित आवागमन

आदर्श मिश्रा द्वारा तैयार किया गया यह ऑटोमैटिक ब्रिज सिस्टम ट्रेन के आवागमन के अनुसार खुद ही सक्रिय हो जाता है. जब किसी ट्रैक पर ट्रेन आने वाली होती है, तो यह स्मार्ट ब्रिज स्वतः हट जाता है, जिससे ट्रेन बिना किसी बाधा के गुजर सकती है. इस दौरान कोई व्यक्ति ट्रैक पार नहीं कर पाता, जिससे दुर्घटना की संभावना कम हो जाती है.

जब ट्रेन गुजर जाती है, तो यह ब्रिज फिर से अपने मूल रूप में आ जाता है, जिससे यात्री आसानी से एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जा सकते हैं. इस प्रकार यह स्मार्ट ब्रिज यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनकी सुविधा भी बढ़ाता है.

रेलवे स्टेशनों पर आमतौर पर ओवरब्रिज की व्यवस्था होती है, लेकिन कई लोग, खासकर बुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति, इसका उपयोग करने में असमर्थ होते हैं. ऐसे लोगों के लिए यह स्मार्ट ब्रिज एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.

यात्रियों को सुरक्षा के साथ सुविधा

आदर्श मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट को विशेष रूप से बुजुर्गों और अस्वस्थ लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. उम्र बढ़ने या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण ओवरब्रिज का उपयोग करना कठिन हो जाता है. ऐसे में यह स्मार्ट ब्रिज उनके लिए सुरक्षित और आसान आवागमन का साधन बन सकता है.

उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में लगभग 15 हजार रुपये का खर्च आया है. इसे बनाने के लिए कुछ ऐसे उपकरणों का उपयोग किया गया, जो स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध नहीं थे, इसलिए उन्हें बाहर से मंगवाना पड़ा.

आदर्श ने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने में विद्यालय प्रशासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा. निर्माण के दौरान जब भी उन्हें कोई समस्या आती थी, तो वे अपने शिक्षकों से सलाह लेते थे, जिससे उन्हें सही मार्गदर्शन मिलता था.

तकनीकी दृष्टि से यह स्मार्ट ब्रिज न केवल रेलवे सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, बल्कि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सुविधा भी प्रदान कर सकता है.



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