ठंड के मौसम लहसुन की खेती… रखें इन 7 बातों का ध्यान, 5 महीने में बन जाएंगे ‘धन्ना सेठ’
अगर किसान सही समय, मिट्टी और तकनीक का ध्यान रखकर लहसुन की खेती करें, तो बंपर पैदावार का लाभ ले सकते हैं.वैसे लहसुन को लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, लेकिन दोमट मिट्टी बेस्ट मानी है. अगर किसान वैज्ञानिक तरीके से लहसुन की खेती करें तो उनके लिए लहसुन फायदे का सौदा हो सकता है. परंतु लहसुन की बुवाई करने से पहले किसानों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी कृषि शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि लहसुन की बुवाई के लिए अक्टूबर महीना सबसे सही माना जाता है. इस महीने में मौसम में परिवर्तन होने के साथ ही हल्की ठंडक का एहसास होने लगता है. लहसुन की फसल के लिए ठंडा मौसम फायदेमंद माना जाता है. इस दौरान लहसुन की बुवाई करने पर फसल को उगाने के लिए आवश्यकता अनुसार समय मिल जाता है. साथ ही फसल अच्छी तरह से ग्रोथ भी करती है. जिससे पैदावार भी अच्छी होती है.
लहसुन की बेस्ट किस्में
शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि लहसुन की खेती के लिए मध्यम तापमान और दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. हालांकि खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. इसके लिए खेत का 2 से 3 बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना चाहिए और नमी भी बनाए रखें. ज्यादा समय तक पानी ठहरने से कंद सड़ भी सकते हैं. लहसुन की यमुना सफेद -3, अग्रीफाउंड व्हाइट ,यमुना सफेद -2 उन्नत प्रजातियां मानी जाती हैं. जो अपनी अधिक पैदावार एवं कई अन्य गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं.
मिट्टी की तैयारी : लहसुन के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का pH स्तर 6-7 के बीच होना चाहिए. बुवाई से पहले खेत की 2-3 बार जुताई करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए.
बीज का चयन : उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के बीज (कली) का चयन करें. 8-10 ग्राम वजन की कलियां बोने के लिए आदर्श होती हैं. बीज की कीमत ज्यादा होती है, लेकिन अच्छी उपज सुनिश्चित करती है.
बीज की दूरी : लहसुन की कलियों को 10-12 सेमी की दूरी पर लगाएं और पंक्तियों के बीच 15-20 सेमी की दूरी रखें.
उर्वरक प्रबंधन : जैविक खाद का उपयोग करें जैसे कि गोबर की खाद. इसके साथ ही नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें.
कीट और रोग नियंत्रण : लहसुन की फसल में सफेद मक्खी और फफूंद का खतरा रहता है. जैविक कीटनाशकों का उपयोग करें और समय-समय पर फसल की जांच करते रहें.