तार से कूदे..हड्डियां टूटीं.. फिर भी क्यों नहीं बच पाए 15 लोग..अग्निकांड की शॉकिंग तस्वीरे

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तार से कूदे..हड्डियां टूटीं.. फिर भी क्यों नहीं बच पाए 15 लोग..अग्निकांड की शॉकिंग तस्वीरे


अब लखनऊ में ऐसा ही भयंकर कांड हुआ, जिसमें बीस बीस-तीस तीस साल के लड़के लड़कियों की मौत हो गई. किसी का दम घुट गया, कोई जिंदा जल गया. ऐसा भयानक हादसा हुआ, जिसकी तस्वीरें देखकर ही कलेजा कांप गया. लड़के लड़कियां अंदर चीख रहे थे. चिल्ला रहे थे. बचाने की गुहार लगा रहे थे. लेकिन बिल्डिंग ऐसी बनी थी. आग ऐसी भयंकर लगी थी. ना बचने का कोई रास्ता था, ना निकलने का कोई रास्ता था. रास्ता सिर्फ एक ही था या तो छलांग लगा दें या फिर किसी रस्सी के सहारे नीचे उतर जाएं. वहां रस्सी तो कोई नहीं मिली, तार पकड़ कर कुछ लटक गए और नीचे उतर कर जान बचाई

कुछ ने जलती बिल्डिंग से नीचे छलांग लगा दी. हड्डियां टूटी लेकिन जान बच गई. लेकिन बहुत सारे ऐसे बच्चे थे जिनका दम घुट गया, जो अंदर ही छटपटाते रह गए, और आखिर में वहीं जलती बिल्डिंग के बीच दम तोड़ दिया. उनकी सांसें उखड़ गईं. बहुत ही दर्दनाक, बहुत ही भयावह हादसा है ये. इसकी डिटेल बताते हुए भी रोंगटे खड़े हो रहे हैं. लखनऊ की तस्वीरें देखकर ही सबकी आंखें भर आ रही हैं क्योंकि बात उन बच्चों की है, जो कुछ सीखकर जिंदगी में बेहतर करना चाहते थे. लेकिन यहां तो सारे सपने ही राख हो गए. उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी. जिनके अपने बच्चे इस बिल्डिंग में थे. जिनके पास बच्चे ने कॉल की थी कि पापा आकर बचा लो. यहां आग लगी है. इससे दुखद कुछ और नहीं हो सकता.

जिम्मेदारों पर सीएम योगी का चला डंडा

ये सीएम योगी के लिए मन को व्यथित कर देने वाला हादसा है. जिस वक्त लखनऊ में ये हादसा हुआ, सीएम योगी अलीगढ़ में थे. वो सब कुछ छोड़ छाड़ करके तुरंत लखनऊ पहुंचे. वहां मौके पर जाकर अधिकारियों से बात की. इस हादसे का पूरा ब्योरा लिया. इससे पहले उनके डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक वहां मौजूद थे. वहां ऐसा भयानक हाल था, कि खुद ब्रजेश पाठक भावुक हो गए. वो एक तरह से रोने लगे. लखनऊ के इस बड़े हादसे की एक एक तस्वीर आपको दिखाएंगे. इस अग्निकांड के पीछे क्या लापरवाही हुई, कौन है इस अग्निकांड का जिम्मेदार. बार बार लग रही आग के इतने बड़े बड़े कांड होने के बावजूद क्यों इसे रोकने के लिए बड़े एक्शन कहने के बावजूद नहीं हो रहे. लेकिन पहले लखनऊ में क्या हुआ.

जान बचाने के लिए लोग छज्जे से कूदे

लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड की तस्वीरों ने पूरे देश को सन्न कर दिया है. इस अग्निकांड में मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई है. 7 से 8 लोग अभी भी घायल हैं. ये अग्निकांड लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुआ. जहां इस बिल्डिंग में एक ग्राफिक्स एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर चलता था. बिल्डिंग में आग लगी, भयंकर आग दिख रही है. बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर से लोग कूद रहे हैं. लोगों ने नीचे कूद कर जान बचाने की कोशिश की. इस तस्वीर में दिख रहा है कि कैसे एक व्यक्ति बिल्डिंग की पहली फ्लोर से कूदा और नीचे रेलिंग से टकरा गया. आसपास के लोग उसे बचाने के लिए तुरंत भागे.

किनकी जान बच पाई

जो लोग बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर या सेकेंड फ्लोर से कूद पाए, सिर्फ उनकी ही जान बची
जो लोग कोशिश कर रहे थे कि आग थोड़ी कम हो जाए, या सीढ़ियों के रास्ते निकल जाएं
इनमें किसी को भी मौका नहीं मिला, क्योंकि सीढ़ियों का संकरा रास्ता था, सफोकेशन ज्यादा था
जो लोग ऊपर से नीचे कूदे, किसी को कमर में चोट लगी, पीठ में चोट लगी, हड्डी टूट गई
जान सिर्फ उन्हीं की बची है, जिन्होंने आग से बचने के लिए ऊपर से छलांग लगा दी
या फिर उन लोगों की जान बची जो बिल्डिंग से लटके तारों के सहारे नीचे आ गए.
बिल्डिंग में आग तेजी से फैल रही थी. बचने का कोई इमरजेंसी रास्ता नहीं था. ऐसे में बिल्डिंग में मौजूद लोगों ने कैसे अपनी जान बचाई उसका भयानक वीडियो सामने आया है. आग लगने के दौरान ये लोग बिल्डिंग के बाहर लटक रहे तार से लटकर नीचे आने लगे. आग तेजी से बढ़ रही थी. और इनका एकमात्र सहारा बाहर लटके तार बने.
करीब 7 से 8 लोग तार पकड़कर नीचे आए हैं. इस दौरान एक लड़की भी तार पकड़कर आग से जान बचाने के लिए नीचे आती दिखी.

फायर सेफ्टी के लिए आवेदन ही नहीं दिया

कमर्शियल बिल्डिंग के लिए FIRE NOC लेना जरूरी होता है. शुरुआती जांच में ये पता चला है कि बिल्डिंग के मालिक ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के लिए कभी आवदेन ही नहीं किया था. ना ही इमारत में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम थे.

ये भी आरोप लग है कि कागजों पर जो नक्शा पास कराया गया था, वो असल निर्माण से बिल्कुल अलग था

नियम के मुताबिक कमर्शियल बिल्डिंग में चारों तरफ या आगे पीछे एक निश्चित खुली जगह (Setback Area) छोड़नी होती है

ताकि इमरजेंसी हालात में इसका इस्तेमाल किया जा सके.

आरोप है कि बिल्डिंग में ऐसा कोई एरिया नहीं छोड़ा गया था . सेटबैक एरिया को भी कवर कर दिया गया था

यही वजह थी कि जब आग लगी, तो धुआं निकलने की कोई जगह नहीं बची और पूरी बिल्डिंग ‘गैस चेंबर’ बन गई.

फायर फाइटर्स को अंदर घुसने के लिए बगल की इमारत की दीवार तक को तोड़ना पड़ा

युद्ध स्तर काम करनी होगी

आए दिन इस तरह की घटना हो रही है. दिल्ली में सबने देखा कि कैसे पूरा परिवार बर्बाद हो गया है. लोग आए थे इलाज करवाने लेकिन सब कुछ गंवा दिया है. इस तरह की घटनाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही है. और ज्यादातर मामलों में यही दिखता है कि नियम तोड़े गए. एक सेट पैटर्न दिखता है कि नियमों की अनदेखी हादसे की वजह बन जाती है. लेकिन इसके बावजूद सबक नहीं लिया जाता. कुछ दिन हल्ला मचता है उसके बाद फिर वही पुराने ढर्रे पर चीजें चलने लगती है. ऐसी घटनाएं बार बार ना हो. इसका कोई परमानेंट इलाज करना होगा. ताकि ऐसी घटनाएं बार बार ना हो. हर बिल्डिंग का फॉयर ऑडिट युद्ध स्तर पर करवाना होगा. नियमों के पालन को लेकर जीरो टॉलरेंस अपनाना होगा.



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