दुर्लभ पैंगोलिन का सुरक्षित ठिकाना है यूपी का दुधवा नेशनल पार्क, बाघ भी नहीं कर पाता हमला

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दुर्लभ पैंगोलिन का सुरक्षित ठिकाना है यूपी का दुधवा नेशनल पार्क, बाघ भी नहीं कर पाता हमला


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छिपकली की तरह दिखने वाला पैंगोलिन स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है. पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए हैं. पैंगोलिन शर्मीले प्रवृति का जीव है, जो धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से पाए जाते हैं. ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं. शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स होती है. जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में कई ऐसे वन्य जीव पाए जाते हैं, जो दुर्लभ हो जा चुके हैं, यह विलुप्त होने की कगार पर आ गए हैं. एक ऐसा स्तनधारी जीव जो आपको कभी कहीं नहीं आपने देखा होगा. पैंगोलिन रात में सक्रिय जीव हैं, जो कठोर शल्कों (scales) से ढके होते हैं.

लखीमपुर खीरीः जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व में कई ऐसे वन्य जीव पाए जाते हैं, जो दुर्लभ हो जा चुके हैं, यह विलुप्त होने की कगार पर आ गए हैं. एक ऐसा स्तनधारी जीव जो आपको कभी कहीं नहीं आपने देखा होगा. पैंगोलिन रात में सक्रिय जीव हैं, जो कठोर शल्कों (scales) से ढके होते हैं.

सांप, छिपकली की तरह दिखने वाला पैंगोलिन स्तनधारी जीवों की श्रेणी में आता है. पैंगोलिन विलुप्त होने वाले जीवों की श्रेणी में पहुंच गए हैं. पैंगोलिन शर्मीले प्रवृति का जीव है, जो धरती पर लगभग 60 मिलियन सालों से पाए जाते हैं. ये जीव चींटियां खाकर गुजारा करते हैं. शरीर पर कड़ी और सुनहरी-भूरी स्केल्स होती है. ये 45 इंच से लेकर 4.5 फीट लंबे हो सकते हैं. दुनिया में इनकी 8 प्रजातियां पाई जाती हैं.  जैसे ही कोई खतरा महसूस होता है, ये अपने शरीर को गेंद की तरह गोल बना लेते हैं . आपको जानकर हैरानी होगी कि एक एडल्ट पैंगोलिन एक साल में 7 करोड़ कीड़े या चीटियों आदि को खा सकती है.

पैंगोलिन रात को बिल से निकलता है बाहर

भारतीय पैंगोलिन दिन के बजाय रात का जीव है, जो दिन के समय गहरी मिट्टी में स्थित अपने बिल में विश्राम करता है. जैसे ही रात का अंधेरा छाता है, वह बाहर निकलकर भोजन की खोज करता है. ठंडी सर्दियों में, जब तापमान गिरता है, तो यह अपने ठिकाने को और गहरा कर लेता है, जिससे वह ठंडी हवाओं से बचा रहता है. इसका आश्रय न केवल ठंड से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि शिकारियों से भी इसे सुरक्षित रखता है.

यह अपने आहार के लिए चुपचाप निकलता है, जिसमें मुख्य रूप से चींटियां और दीमक शामिल होते हैं. पैंगोलिन की लंबी और चिपकने वाली जीभ इन्हें पकड़ने में विशेष रूप से प्रभावी होती है. भोजन करने की उसकी प्रक्रिया अद्वितीय है; वह अपने शक्तिशाली पंजों का प्रयोग करते हुए दीमकों के बिल्लों और चींटियों के अंडों को बाहर निकालता है और फिर अपनी जीभ की मदद से उन्हें खाना शुरू करता है.

खतरा महसूस करने पर बन जाता है गोल

बातचीत करते हुए अशोक कुमार कश्यप रिटायर रेंज ऑफिसर ने जानकारी देते हुए बताया कि दुधवा में कई ऐसे वन्य जीव पाए जाते हैं. जो बहुत कम दिखाई देते हैं, उन्ही में से एक है पैंगोलिन. इसके दांत नहीं होते हैं. कोई भी जीव इस पर हमला नहीं कर पता है. खतरा महसूस होने पर अपने शरीर को गेंद की तरह गोल कर लेता है. इसके मजबूत शल्क शिकारी जानवरों से रक्षा करते हैं . इसकी जीभ शरीर से भी लंबी हो सकती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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