देसी फल लेकिन नाम विदेशी..जानिए कैसे पड़ा आम का नाम अल्फांसो
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गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में एक खास किस्म के आम की चमक हर किसी का ध्यान खींच लेती है. केसरिया रंग, रसीला गूदा और ऐसी खुशबू कि पूरा घर महक जाए. जी हां, हम बात कर रहे हैं अल्फांसो आम की, जिसे पूरी दुनिया ‘आमों का राजा’ भी कहती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक विशुद्ध भारतीय फल का नाम इतना विदेशी क्यों है?
सहारनपुर जनपद, जिसे ‘मैंगो बेल्ट’ के नाम से जाना जाता है, यहां किसान आम की सैकड़ों किस्मों की खेती करते हैं. आम का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन आज हम जिस खास आम की बात कर रहे हैं, उसका इतिहास बेहद रोचक है. गर्मियों में बाजारों में एक खास किस्म का आम अपनी केसरिया रंगत, रसीले गूदे और मनमोहक खुशबू से हर किसी का ध्यान खींच लेता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं अल्फांसो आम की, जिसे दुनिया भर में ‘आमों का राजा’ कहा जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक भारतीय फल का नाम इतना विदेशी क्यों है? इसके पीछे 500 साल पुराना दिलचस्प इतिहास छिपा है.
कैसे पड़ा आम का नाम अल्फांसो
अल्फांसो आम का नाम किसी फल विशेषज्ञ के नाम पर नहीं, बल्कि पुर्तगाली जनरल अफ़ोंसो डी अल्बुकर्क के नाम पर रखा गया है. 15वीं शताब्दी में भारत आए इस जनरल को ‘गोवा का विजेता’ भी कहा जाता है. पुर्तगाली भारत में मसालों की खोज में आए थे, लेकिन अनजाने में उन्होंने हमें दुनिया के सबसे स्वादिष्ट आमों में से एक का तोहफा दिया. उस समय भारत में आम तो थे, लेकिन वे आज के अल्फांसो जैसे नहीं थे. पुर्तगालियों को अपने साथ लाए गए ब्राजीलियाई फलों का स्वाद पसंद था. इसी दौरान उन्होंने भारतीय आम के पौधों पर ग्राफ्टिंग तकनीक का प्रयोग किया. अफ़ोंसो के संरक्षण में इस तकनीक को बढ़ावा मिला और एक नई किस्म विकसित हुई, जो स्वाद में बेमिसाल थी. दिलचस्प बात यह है कि जिसे हम ‘अल्फांसो’ कहते हैं, स्थानीय लोग उसे ‘हापुस’ नाम से भी जानते हैं.
रंग, स्वाद और खुशबू में खास
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी व प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि अल्फांसो आम का इतिहास बेहद खास है. उनके अनुसार, पुर्तगाल के जनरल अफ़ोंसो को आम बहुत पसंद था और वे अपने देश से आम की कलमें लेकर भारत आए थे. उन्हीं के प्रयासों और ग्राफ्टिंग तकनीक के जरिए इस नई किस्म का विकास हुआ.
अल्फांसो आम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें फाइबर बहुत कम होता है, जबकि इसका स्वाद बेहद मीठा और रसीला होता है. इसकी खुशबू इतनी खास होती है कि यह दूर से ही पहचान में आ जाती है. यही कारण है कि इस आम का नाम पुर्तगाली जनरल अल्फांसो के नाम पर पड़ा.
वर्तमान में यह दुर्लभ किस्म धीरे-धीरे सहारनपुर के किसानों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है. किसान इस वैरायटी को अपने खेतों में लगाकर इसका क्षेत्रफल बढ़ा रहे हैं, जिससे यह खास आम अब इस क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें