पढ़ाई के साथ अब गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों को सिखाया जाएगा खेती का गुर
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्थापित हो रही हाई-टेक नर्सरी अब एग्री इनोवेशन लैब के रूप में काम करेगी, जो छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा देगी और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए कृषि नवाचार और ग्रामीण विकास को ब…और पढ़ें
यह न केवल कृषि शिक्षा में नवाचार का प्रतीक बनेगी,
रजत भट्ट/गोरखपुर- गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर कृषि क्षेत्र में नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है. विश्वविद्यालय के कृषि और प्राकृतिक विज्ञान संस्थान के अंतर्गत एक हाई-टेक नर्सरी स्थापित की जा रही है, जो अब केवल एक नर्सरी नहीं, बल्कि एक ‘एग्री इनोवेशन लैब’ के रूप में कार्य करेगी. इस पहल का उद्देश्य न केवल विश्वविद्यालय की भूमिका को विस्तारित करना है, बल्कि क्षेत्रीय किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार भी खोलना है.
छात्रों के लिए नया अनुभव
इस नर्सरी का मुख्य उद्देश्य यह है कि, कृषि छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखा जाए. उन्हें नर्सरी प्रबंधन, पॉलीहाउस तकनीक, रोगमुक्त बीज उत्पादन और आधुनिक पौध प्रवर्धन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो. यह विश्वविद्यालय के एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स को न केवल नौकरियों में बल्कि स्टार्टअप के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा.
किसानों के लिए टेक्नोलॉजी हब
यह हाई-टेक नर्सरी किसानों के लिए एक ‘टेक्नोलॉजी हब’ के रूप में कार्य करेगी. यहां पर किसान पॉलीहाउस तकनीक, फॉगर सिस्टम, और प्रकाश संश्लेषण प्रणाली (PAR लैंप) जैसी उन्नत प्रणालियों से परिचित हो सकेंगे. इसके साथ ही उन्हें रियायती दरों पर पौध रोपण सामग्री भी प्राप्त होगी, जिससे क्षेत्रीय कृषि उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार संभव होगा.
यूनिवर्सिटी बनेगी कृषि नवाचार की मिसाल
कुलपति प्रो. पूनम टंडन के अनुसार, यह पहल गोरखपुर विश्वविद्यालय को कृषि शिक्षा में अग्रणी बनाएगी. यह विश्वविद्यालय पूर्वांचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने वाला एक मॉडल इंस्टिट्यूशन बन सकता है. इसके माध्यम से, विश्वविद्यालय कृषि नवाचार, सतत विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण के केन्द्र के रूप में उभर सकता है.
रोजगार और उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि, यह नर्सरी स्थानीय युवाओं और छात्रों के लिए रोजगार सृजन और उद्यमिता के नए रास्ते खोलेगी. फल-सब्जियों की व्यावसायिक खेती, बायोफर्टिलाइजर निर्माण, और बीज उत्पादन जैसी गतिविधियों के लिए यह एक ट्रेनिंग और रिसोर्स सेंटर बन जाएगा.