फाइव स्टार होटलों में खाया जाता है इस किसान का तरबूज! बिकता है तीन गुना दाम पर!

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फाइव स्टार होटलों में खाया जाता है इस किसान का तरबूज! बिकता है तीन गुना दाम पर!


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Organic Water Melon Farming: शुद्ध खाने की तलाश में इस किसान ने ऑर्गेनिक खेती शुरू की. आज इनके लगाए गए तरबूज की बाजार में जबरदस्त डिमांड रहती है और ये सामान्य तरबूज से तीन गुना अधिक कीमत पर बिकते हैं.

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फाइव स्टार होटलों में खाया जाता है सहारनपुर के इस किसान का तरबूज

हाइलाइट्स

  • सहारनपुर के किसान आदित्य त्यागी ने ऑर्गेनिक तरबूज की खेती शुरू की.
  • उनके तरबूज देहरादून के फाइव स्टार होटलों में तीन गुना दाम पर बिकते हैं.
  • ऑर्गेनिक तरबूज का प्राकृतिक लाल रंग और मिठास लोगों को पसंद आ रही है.

सहारनपुर. सहारनपुर के किसान खेती में कमाल कर रहे हैं. यहां के किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को भी सच करने का काम कर रहे हैं जो कि प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को लेकर देखा है. हम बात कर रहे हैं सहारनपुर के बेहट रोड स्थित मेहरबानी गांव के रहने वाले किसान आदित्य त्यागी की, जिन्होंने 2015 में वन विभाग की नौकरी से रिटायर होने के बाद अपने गांव की ज़मीन में ऑर्गेनिक खेती करना शुरू किया.

शुद्ध खाने की तलाश में शुरू की खेती
आदित्य त्यागी को शुद्ध खाना पसंद है, इसलिए उन्होंने भी लोगों को शुद्ध खिलाने के लिए ऑर्गेनिक खेती शुरू की. ऑर्गेनिक खेती में आदित्य त्यागी अलग-अलग प्रकार की सब्जियों, फलों को लगाते हैं और उनकी सब्जी व फल बाज़ार में दूसरी सब्जियों व फलों से कई गुना ज़्यादा दाम पर भी बिकते हैं. इन्होंने इस बार अपने खेत में तरबूज की खेती की है, जो कि उन्होंने पिछले साल ही शुरू की थी.

पिछले साल लगाए गए तरबूज की बहुत ज़्यादा मांग उनके पास आई थी, इसलिए एक बार फिर से उन्होंने तरबूज की खेती की है और उनका ये तरबूज देहरादून के फाइव स्टार होटल में खाया जा रहा है. लोग इसे खूब पसंद करते हैं और अच्छे दाम भी देते हैं.

फाइव स्टार होटलों में खाया जाता है ये तरबूज
किसान आदित्य त्यागी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि वे पिछले दो साल से तरबूज की खेती कर रहे हैं. उन्होंने अपने खेत में लाल रंग का देसी तरबूज लगाया है. आजकल देखने में आता है कि बाज़ार में बहुत ज़्यादा केमिकल वाले तरबूज आ रहे हैं, जिनको इंजेक्शन लगाकर मीठा और लाल किया जाता है, जोकि खाने वालों के लिए ज़हर का काम करता है. इसको देखते हुए वे अपने खेत में ऑर्गेनिक तरीके से तरबूज की खेती कर रहे हैं, जिसमें उनके तरबूज का प्राकृतिक लाल रंग आता है, जबकि वह खाने में भी काफी मीठा लगता है.

मिलते हैं तीन गुना दाम
पिछले साल जितनी भी मांग आई, उस मांग को वह पूरा नहीं कर पाए. इस बार फिर से उन्होंने अपने खेत में तरबूज लगाया है. उन्होंने अपने 6 बीघा खेत में तरबूज की खेती की है. उनके पास देसी गाय है, जिसके गोमूत्र से वह नीम और दूसरी चीज़ों को मिलाकर जीवामृत तैयार करते हैं, जिसका इस्तेमाल तरबूज की फसल पर किया जाता है. साथ ही गोबर का वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाकर ज़मीन में डाला जाता है. जबकि बाज़ार में उनका यह ऑर्गेनिक तरबूज बिकने वाले तरबूज से तीन गुना ज़्यादा दाम पर बिकता है.

कैसे करें असली तरबूज की पहचान
खास बात यह है कि उनका यह तरबूज सहारनपुर में नहीं, बल्कि देहरादून में काफी पसंद किया जा रहा है. वहां के फाइव स्टार होटल में यह खूब खाया जा रहा है. वहीं अगर बाज़ार में बिकने वाले तरबूज को आपको पहचानना है तो उसे काटकर टिशू पेपर लगाकर देखें. अगर टिशू पेपर पर लाल रंग आ जाता है तो समझ लीजिए वह केमिकल वाला तरबूज है, जबकि बिना केमिकल वाले तरबूज का रंग नहीं निकलेगा.

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