बनारस बनेगा और भी हरा-भरा: करसड़ा में कूड़े की जगह लहलहाएगा ‘ग्रीन लंग्स’
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Varanasi News: वाराणसी के करसड़ा में बरसों से जमा 12.5 लाख टन कूड़े के पहाड़ को अब बायोमाइनिंग तकनीक से पूरी तरह खत्म किया जाएगा. नगर निगम ने इसके लिए 50 करोड़ का बजट और एमओयू तैयार कर लिया है. कचरा हटने के बाद खाली होने वाली 25 एकड़ जमीन पर जापानी ‘मियावाकी पद्धति’ से घना जंगल विकसित होगा, जो शहर के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ का काम करेगा. अगले डेढ़ साल में काशी को इस कचरे के बोझ से स्थाई मुक्ति मिल जाएगी.
Varanasi News: उत्तर प्रदेश की धार्मिक राजधानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को अब कचरे के बोझ से मुक्ति मिलने वाली है. बनारस के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के बाद अब योगी सरकार ने शहर की स्वच्छता और पर्यावरण को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. दिल्ली के गाजीपुर जैसे कूड़े के पहाड़ों की तर्ज पर अब वाराणसी के करसड़ा में स्थित कचरे के ढेर को पूरी तरह खत्म किया जाएगा. इस जगह को न केवल साफ किया जाएगा, बल्कि यहां जापानी तकनीक ‘मियावाकी’ का उपयोग करके एक विशाल ‘ग्रीन जोन’ विकसित किया जाएगा.
करसड़ा में खत्म होगा 12 लाख टन का ‘कूड़े का पहाड़’
वाराणसी के करसड़ा गांव में पिछले कई सालों से शहर का कूड़ा डंप किया जा रहा है. आलम यह है कि यहां लगभग 12.5 लाख टन कचरे का एक विशाल पहाड़ खड़ा हो गया है. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है. नगर निगम के जन संपर्क अधिकारी (पीआरओ) संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, इस लीगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) के निस्तारण के लिए एक विशेष संस्था के साथ एमओयू साइन किया गया है. करीब 50 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत अगले एक से डेढ़ साल में इस पूरे इलाके को कचरा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
बायोमाइनिंग तकनीक से होगा कचरे का निस्तारण
इस परियोजना की सबसे खास बात इसमें इस्तेमाल होने वाली ‘बायोमाइनिंग’ तकनीक है. यह एक वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें सूक्ष्मजीवों की मदद से कचरे का विघटन किया जाता है. इस प्रक्रिया में कचरे के ढेर से प्रदूषित हवा और जहरीले तरल (लीचेट) को बाहर निकालकर उसे सुरक्षित बनाया जाता है. निस्तारण के दौरान कचरे से उपयोगी ठोस वस्तुएं निकाली जाएंगी और इससे बायो-कोयला भी बनाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल उद्योगों में ईंधन के रूप में हो सकेगा.
25 एकड़ में बनेगा जापानी ‘मियावाकी वन’
कूड़े का पहाड़ हटने के बाद करसड़ा में करीब 25 एकड़ की बेशकीमती जमीन खाली होगी. नगर निगम इस पूरी जमीन पर ‘मियावाकी वन’ तैयार करने जा रहा है. जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह पद्धति कम जगह में घने जंगल उगाने के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इस तकनीक से लगाए गए पौधे सामान्य के मुकाबले 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और केवल तीन साल में ही आत्मनिर्भर और घने जंगल का रूप ले लेते हैं. यह जंगल न केवल वाराणसी के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ का काम करेगा, बल्कि आसपास के जिलों के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने और धूल कणों को सोखने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा.
क्षेत्रीय जनता को मिलेगी बड़ी राहत
करसड़ा और आसपास के गांवों के लोग लंबे समय से कचरे की दुर्गंध और इससे होने वाली बीमारियों से परेशान थे. नगर निगम की इस पहल से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में भी सुधार होगा. नगर आयुक्त ने संबंधित संस्था को जल्द से जल्द कार्ययोजना पर अमल करने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय सीमा के भीतर बनारस को इस कलंक से मुक्ति मिल सके.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें