बाढ़ से पानी में डूबी है गन्ने की फसल? लगने लगा है रोग? तो बचाव के लिए करें ये काम, हो जाएगी सुरक्षित

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बाढ़ से पानी में डूबी है गन्ने की फसल? लगने लगा है रोग? तो बचाव के लिए करें ये काम, हो जाएगी सुरक्षित


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Agriculture News: लखीमपुर खीरी में शारदा नदी की बाढ़ से गन्ने की फसल डूब गई है, किसान परेशान हैं. प्रदीप कुमार ने फसल बचाने के लिए नालियां, पोषक तत्व और ट्राइकोडर्मा के प्रयोग की सलाह दी है.

लखीमपुर खीरी : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती करते हैं. इसीलिए खीरी जिले को चीनी का कटोरा कहा जाता है. कम लागत में अधिक मुनाफा इसकी खेती से कमाया जा सकता है. वहीं शारदा नदी में आई बाढ़ के बाद गन्ने की फसल पूरी तरीके से डूब गई है. करीब एक माह से अधिक समय बीत गया है, जिस कारण गन्ने की फसल में जल भराव की समस्या बनी हुई है. धीरे-धीरे गन्ने की फसल बर्बाद हो रही है. ऐसे में कीटों का भी प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. इस कारण किसान बेहद परेशान हैं.

वैज्ञानिक प्रदीप कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जब खेत में कई दिनों तक पानी भरा रहता है, तो गन्ने की जड़ों तक हवा नहीं पहुंच पाती, जिसके कारण जड़ों का विकास पूरी तरह से रुक जाता है. इस स्थिति में पुरानी जड़ें काम करना बंद कर देती हैं और नई जड़ें भी नहीं निकल पातीं. इसके साथ ही, मिट्टी में मौजूद जरूरी पोषक तत्व (जैसे कि नाइट्रोजन) पौधे को उपलब्ध नहीं हो पाते हैं.

तराई में आई बाढ़ का कहर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है. ऐसे में सबसे पहले आप गन्ने के खेतों में भरे पानी को सबसे पहले खेतों से निकाल दें. इसके लिए नालियां बनाएं या पंप का उपयोग करें. खेत जितना जल्दी सूखेगा, फसल के बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी. फसल को दोबारा तेजी से बढ़ाने के लिए उसे तुरंत पोषण देना जरूरी है.

इन पोषक तत्वों का करें प्रयोग 

खेतों में भरे पानी के निकलने के बाद आप खेतों में नाइट्रोजन, पोटाश, सल्फर 25 किलो प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करना चाहिए. सल्फर पौधे को ताकत देगा और खराब हो चुकी गन्ने की फसल को सुधारेगा.

पानी भरने से गन्ने में लाल सड़न यानि रेड राट जैसी फफूंद वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में आप गन्ने के खेतों में ट्राइकोडर्मा का उपयोग करें. यह फंगस को नष्ट करने में मदद करता है.

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Lalit Bhatt

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें

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बाढ़ से गन्ने के खेत में भरा है पानी? तो फसल के बचाव के लिए करें ये काम



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