बारिश में भेड़ पालन कर रहे हैं? इन बातों का रखें खास ध्यान, हो सकता है नुकसान
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Sheep Farming: बारिश के मौसम में जहां किसान फसलों के लिए पानी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, वहीं भेड़ और बकरी पालकों के लिए यह समय मुश्किलें लेकर आता है. लगातार गीली जमीन और नमी के कारण पशुओं में खुर सड़न जैसी बीमारियां फैलने लगती हैं, जो उनके चलने-फिरने और सेहत पर बुरा असर डालती हैं. ऐसे में पशुपालकों के लिए समय पर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.
भेड़ का ऊन बच्चों के लिए काफी उपयोगी होता है. इसके साथ, यह मोटे ऊन दरी और कालीन के लिए अच्छे माने जाते हैं. गर्मी और बरसात के पहले ही भेड़ के शरीर से ऊन की कटाई कर लेनी चाहिए. शरीर पर ऊन रहने से गर्मी और बरसात का बुरा प्रभाव पड़ता है. जाड़ा जाने के पहले ही ऊन की कटाई कर लेनी चाहिए. जाड़े में स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. शरीर के वजन का लगभग 40-50 प्रतिशत मांस के रूप में प्राप्त होता है.

किसान दूधनाथ पाल ने बताया कि एक भेड़ को तैयार होने में औसतन 6 से 7 महीने लगते हैं. हालांकि यह आंकड़ा भेड़ों को खाने-पिलाने पर भी निर्भर करता है. अगर इनको दाना ठीक मात्रा में दिया जाए तो भेड़ 5 महीने में ही तैयार हो सकते हैं.

वैसे तो किसान दूधनाथ पाल ने भेड़ों का पालन ऊन के लिए नहीं किया. लेकिन, भेड़ों को बेचकर वे हर साल लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. इसमें 6 महीने में एक भेड़ की कीमत लगभग 6 से 7 हजार रुपए होती है. इस हिसाब से, हर साल लगभग 100 भेड़ पालकर बेचे जाएं तो 4 से 5 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है.

इस मानसून सीजन में पशुओं में फड़किया बीमारी फैलने का खतरा रहता है. इसमें भेड़ और बकरी हरी कच्ची घास या खेत में लगी मूंगफली के पौधे खा लेती हैं, जिससे यह बीमारी हो जाती है. कई बार पशु हरा चारा अधिक मात्रा में खा लेते हैं, जिससे उनका पेट फूल जाता है, वे चक्कर खाकर गिर जाते हैं और उनकी मौत तक हो जाती है.

ऐसे में यदि पशुपालक समय पर ध्यान न दें तो उनका बाड़ा खाली हो सकता है. इससे बचाव के लिए पशुपालकों को समय पर फड़किया बीमारी का टीका लगवाना जरूरी है. यह टीका एक बार लगने पर करीब 7 महीने तक इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है.

इन सबके अलावा पशुओं के मुंह और उसके आसपास छाले हो सकते हैं. इस दौरान आंख से पानी आना, बुखार जैसी समस्याएं भी होती हैं. इससे बचाव के लिए पीपीआर का टीका समय पर लगवाना चाहिए. यह टीका तीन साल में एक बार लगाया जाता है और भेड़ व बकरी पालकों के लिए बेहद जरूरी है.

बरसात के मौसम में जमीन गीली और नम रहने से पशुओं के खुरों में सड़न पैदा हो जाती है. ऐसे में बकरी और भेड़ के झुंड में कुछ पशु लंगड़ाकर चलते हैं और उन्हें चलने में काफी परेशानी होती है.

ऐसे में पशुपालकों को समझ लेना चाहिए कि पशुओं के पैरों में सड़न हो गई है. बचाव के लिए बकरी और भेड़ के बाड़े को हमेशा सूखा रखें. खुरों में सड़न से बचाने के लिए चूने का स्प्रे करें और घाव को फैलने से रोकने के लिए लाल दवा का प्रयोग करें.