बुखार के साथ शरीर पर गांठ ही गांठ? इस घातक रोग की चपेट में आपका जानवर, न करें ये गलती

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बुखार के साथ शरीर पर गांठ ही गांठ? इस घातक रोग की चपेट में आपका जानवर, न करें ये गलती


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शरीर पर गांठ ही गांठ? इस घातक रोग की चपेट में आपका जानवर, न करें ये गलती

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Lumpy Skin Disease : बारिश का मौसम पशुपालकों के लिए बीमारियों का अंबार लेकर दस्तक दे चुका है. इस मौसम में थोड़ी सी चूक घातक हो सकती है. अक्सर शुरुआत में पशुपालक इन्हें सामान्य कीड़े के काटने या त्वचा संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लोकल 18 से लखीमपुर खीरी के पशु एक्सपर्ट डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि बारिश के साथ वातावरण में नमी बढ़ जाती है. इससे मच्छर, मक्खी, किलनी और दूसरे खून चूसने वाले कीट भी बढ़ने लगते हैं. इस बीमारी में पशु को बुखार, कमजोरी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट देखने को मिलती है. गांठों के आसपास त्वचा में सूजन या दर्द होना, आंख और नाक से पानी आना, अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती दिखाई देना भी इस बीमारी के संकेत हैं.

बरसात का मौसम किसानों के लिए राहत लेकर आता है, लेकिन पशुपालकों के लिए बुरा सपना बन सकता है. बारिश के साथ वातावरण में नमी बढ़ जाती है. इसी के साथ मच्छर, मक्खी, किलनी और दूसरे खून चूसने वाले कीटों की संख्या भी बढ़ने लगती है. यही वजह है कि पशुओं में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है. लखीमपुर के पशु एक्सपर्ट डॉ. एनके त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि इन्हीं बीमारियों में लंपी स्किन डिजीज (LSD) भी शामिल है, जो पशुओं के लिए ज्यादा खतरनाक है.

इस बीमारी में पशु के शरीर पर गोल-गोल उभरी हुई गांठें दिखाई देने लगती हैं. शुरुआत में पशुपालक इन्हें सामान्य कीड़े के काटने या त्वचा संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बाद में गांठों की संख्या बढ़ सकती है. पशु को बुखार, कमजोरी, भूख कम लगना और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

लंपी स्किन डिजीज एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और दूसरे संबंधित पशु प्रजातियों को प्रभावित करती है. इसका मुख्य कारण लंपी स्किन डिजीज वायरस है. यह बीमारी पशु की त्वचा पर गांठें और घाव पैदा कर सकती है. ये रोग मुख्यत: मच्छर, मक्खी और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के माध्यम से हो सकता है. यही कारण है कि बरसात और उसके बाद का समय पशुपालकों के लिए अधिक सतर्क रहने का होता है.

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लंपी स्किन डिजीज के लक्षण पशु की स्थिति और संक्रमण की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं‌. पशु को अचानक बुखार आना‌, भूख कम होना या पशु का चारा छोड़ देना, शरीर पर गोल या उभरी हुई कठोर गांठें दिखाई देना गर्दन, पीठ, पेट, पैर या शरीर के दूसरे हिस्सों पर त्वचा में उभार आना इसके लक्षण हैं. गांठों के आसपास त्वचा में सूजन या दर्द होना, आंख और नाक से पानी या स्राव आना, अत्यधिक कमजोरी और सुस्ती दिखाई देना भी इस बीमारी के संकेत हैं.

डॉ. एनके त्रिपाठी बताते हैं कि लंपी वायरस से संक्रमित होने वाले पशुओं को दूसरे पशुओं से अलग कर दें. इनकी देखभाल करने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं. हाथों को सैनिटाइज भी कर सकते हैं. कोशिश करें कि आप अपने हाथों को पशुओं की स्किन पर न लगाएं. वेटरनरी डॉक्टर की सलाह पर सभी पशुओं का वैक्सीनेशन करा सकते हैं.

इससे बीमारी फैलने का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. पशुपालकों को बरसात के मौसम में अपने पशुओं की साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें. पशुशाला के आसपास पानी जमा न होने दें. गोबर और गंदगी की नियमित सफाई करें, क्योंकि गंदगी और नमी के कारण मच्छर, मक्खी और दूसरे कीटों की संख्या बढ़ सकती है. यही कीट संक्रमण फैलाने में घातक भूमिका निभाते हैं.

पशु एक्सपर्ट डॉ. एन के त्रिपाठी बताते हैं कि बरसात के मौसम में लंपी वायरस का अगर प्रकोप दिखाई दे तो बीमार पशुओं को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें. पशु बाड़े में साफ-सफाई रखें. नीम की पत्तियां या कीटनाशक का छिड़काव करें. घावों पर एंटीसेप्टिक मरहम लगाएं. तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय के डॉक्टर से संपर्क करें.



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