मेरठ की शिप्रा ने समर वेकेशन को बना दिया ‘स्किल कैंप’, फ्री में सिखा रहीं हुनर
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Meerut News: बेटिया शिक्षित होने के साथ-साथ हुनर के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर होंगी, तो निश्चित तौर पर एक बेहतर भविष्य की तरफ कदम बढ़ा सकती हैं. इसी उद्देश्य को लेकर मेरठ के रहने वाली शिप्रा शर्मा कर रही हैं. वह बेटियों को लगातार विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही हैं. आइए उनकी इस काल और हुनर के बारे में जानते हैं.
मेरठ: यूं तो समर वेकेशन के दौरान अक्सर बच्चे आपके मोबाइल, गेमिंग से संबंधित विभिन्न प्रकार की प्रक्रिया में उलझे हुए दिखाई देंगे, जिससे माता-पिता भी काफी परेशान रहते हैं. उनकी चाहत होती है कि जल्दी से स्कूल खुल जाए, जिससे कि बच्चों पढ़ाई पर फोकस रहे. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां शिप्रा शर्मा की ओर से बेटे-बेटियां विभिन्न प्रकार के आर्ट से संबंधित प्रशिक्षण निःशुल्क माध्यम से उपलब्ध कराते हुए नजर आ रही हैं. ऐसे में लोकल 18 की टीम की ओर से शिप्रा शर्मा और अन्य युवाओं से खास बातचीत की गई.
युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए शिप्रा शर्मा ने कहा कि वैसे तो सीखने की कोई भी उम्र नहीं होती, जब मन चाहे व्यक्ति सीख सकते हैं. लेकिन बचपन एक ऐसा समय होता है, तो हम जिस चीज की प्रैक्टिस करें, हम काफी बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकते हैं. इसीलिए ही युवाओं को मधुबनी आर्ट, मंडाला आर्ट, लिप्पन आर्ट सहित विभिन्न प्रकार की आर्ट्स से संबंधित पेंटिंग बनाना सिखा रही हैं, जिससे बच्चे शिक्षा के साथ-साथ आर्ट के क्षेत्र में भी हुनरमंद हो जाएं.
उन्होंने बताया कि इन पेंटिंग की अगर बात की जाए तो जो भी युवा ने प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं, वह उसके बाद अगर पेंटिंग अच्छी बनाकर तैयार करते हैं, तो इनकी कीमत 5000 रुपए से शुरू होती है. उन्होंने बताया कि उनके पास काफी बेटियां सीख रही हैं, जो हाईस्कूल, इंटर और स्नातक से संबंधित कोर्स में भी अध्ययन कर रही हैं.
सीखकर मिला काफी अच्छा अवसर
पिछले 2 साल से निरंतर पेंटिंग बनाती आ रहीं तुलसी ने कहा कि जिस तरह से उन्हें निःशुल्क माध्यम से प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया है, यह उनके अभ्यारण के काफी काम आ रहा है. वह इंटर में अध्ययन कर रही हैं, लेकिन उनकी ओर से जो पेंटिंग बनाई जाती है, वह लोगों को काफी पसंद आती है. इससे वह अपनी पढ़ाई का खर्चा भी खुद ही निकाल लेती हैं. इसी तरीके से आकांक्षा ने भी बताया कि उन्होंने भी 2 साल पहले से सीखना शुरू किया था, तब से वह निरंतर इस तरह की पेंटिंग बनाती हुई आ रही हैं. इसी तरह से यहां पर सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि उनकी माताएं भी विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण निःशुल्क माध्यम से हासिल कर रही हैं.
स्किल डेवलपमेंट जरूरी
कार्यशाला में युवाओं का मार्गदर्शन करने आईं जिला ग्रामोउद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने कहा कि जिस तरह से शिप्रा शर्मा की ओर से बेटे-बेटियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वह काफी अच्छा प्रयास है. शिक्षा के साथ-साथ हुनर भी युवाओं को आना चाहिए. उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान उन्होंने भी देखा कि बच्चे काफी अच्छी पेंटिंग बना लेते हैं. साथ ही बेस्ट मैटेरियल का उपयोग करते हुए किस प्रकार घर को सजाते हैं, उसका भी उन्हें विशेष प्रशिक्षण मिला है. यह उनके बेहतर भविष्य के लिए काफी अच्छा है. बताते चलें की शिप्रा शर्मा इसी तरीके से हर साल समर वेकेशन में कार्यशाला का आयोजन करती हैं. उनकी पेंटिंग की प्रशंसा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी भी कर चुके हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.