रात को तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे लोग, भारत की जीत पर कानपुर में जश्न, लोग बोले-सेना की तरह पाकिस्तान को चटाई धूल
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Kanpur News: भारत ने एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को 5 विकेट से हराया, कानपुर में परेड, फूलबाग, घंटाघर समेत कई इलाकों में जश्न, तिरंगा रैली, मिठाइयां और देशभक्ति के नारे गूंजे.
कानपुर: भारत ने एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान को 5 विकेट से हराकर नया इतिहास रच दिया. जैसे ही टीम इंडिया ने जीत हासिल की, कानपुर की गलियों और चौराहों पर जश्न का माहौल बन गया. हर तरफ आतिशबाजी, ढोल-नगाड़े और देशभक्ति के गीतों से माहौल गूंज उठा. कानपुर महानगर के परेड, फूलबाग, घंटाघर, शास्त्री नगर, गोविंद नगर और किदवई नगर जैसे इलाकों में भारत की जीत के साथ ही सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ आई. युवा हाथों में तिरंगा लेकर नाचते-गाते नजर आए. कई जगहों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और बाइक रैली भी निकाली गई. लोग एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर बधाई दे रहे थे और रात ,को आसमान पटाखों की रोशनी से चमक उठा.
लोगों का कहना था कि यह जीत केवल क्रिकेट की जीत नहीं है, बल्कि पाकिस्तान से लिया गया बदला है. जिस तरह से हमारे सैनिकों ने पहली बार पाकिस्तान को जवाब दिया था, उसी तरह अब हमारे खिलाड़ियों ने सैनिकों के रूप में पाकिस्तान को मैदान में हराया है. कानपुर के कई युवाओं ने कहा कि आज भारतीय खिलाड़ियों के पास सारे तकनीकी हथियार थे—तेज गेंदबाजी मिसाइल, ताबड़तोड़ चौके-छक्के और मजबूत रणनीति वाले बम. इन हथियारों से खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को पूरी तरह धराशाई कर दिया.
देशभक्ति से सराबोर माहौल
भारत की जीत होते ही गलियों में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे गूंजने लगे. छोटे बच्चे तिरंगा लहराते दिखे, तो बुजुर्ग भी घरों से बाहर आकर इस जीत का हिस्सा बने. कई स्थानों पर ढोल-नगाड़े बजाकर युवाओं ने डांस किया और लोगों ने इस ऐतिहासिक जीत को आजादी के जश्न की तरह मनाया.
ऐतिहासिक जीत का अहसास
यह जीत कानपुर के लोगों के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं रही. हर किसी की जुबान पर यही था कि पाकिस्तान को हराकर टीम इंडिया ने करोड़ों भारतीयों का सपना पूरा कर दिया. जीत के बाद शहर की गलियां देर रात तक गूंजती रहीं और जश्न का यह रंग देर रात तक थमता नजर नहीं आया.
भारत की इस जीत ने सिर्फ क्रिकेट का इतिहास नहीं बदला बल्कि देशवासियों के दिलों में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ा दी है. कानपुर सहित पूरे देश में यह जश्न लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि यह सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि पाकिस्तान से मैदान में लिया गया बदला भी है.
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें
पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें