लखनऊ में गूंजा राजस्थान का नाम, जब मारवाड़ के इस लाल ने बेघरों की मदद को बढ़ाया हाथ
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Lucknow Vikas Nagar Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर इलाके में हुई एक भीषण आग ने कई गरीब परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी. जिस जगह लोग अपने छोटे-छोटे सपनों को जोड़कर एक बेहतर भविष्य की उम्मीद कर रहे थे, वहां कुछ ही घंटों में सब कुछ जलकर राख हो गया. मगर, इनकी मदद को जोधपुर की तपती रेत में पले-बढ़े धवल दर्जी सामने आए हैं.
धवल दर्जी और उनकी संस्था ने लोगों की मदद की.
लखनऊ: राजस्थान की माटी की यह तासीर रही है कि यहां के सपूतों ने न केवल युद्ध के मैदान में, बल्कि इंसानियत की जंग में भी हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है. इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर (मारवाड़) के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ धवल दर्जी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वह मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा आज हर जगह हो रही है. दरअसल, लखनऊ के विकास नगर में हुए उस खौफनाक अग्निकांड ने जब सैकड़ों परिवारों को सड़क पर ला दिया, तब मारवाड़ का यह बेटा अपनी टीम के साथ सात समंदर पार नहीं, बल्कि सरहदों को लांघकर सीधे ‘ग्राउंड जीरो’ पर जा पहुंचा.
पन्नियों की ‘भट्टी’ के बीच मारवाड़ का ‘ठंडा आशियाना’
लखनऊ की 40 डिग्री की चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच, प्रशासन राहत के नाम पर प्लास्टिक की पन्नियां बांट रहा था. तब जोधपुर की तपती रेत में पले-बढ़े धवल दर्जी जानते थे कि ये पन्नियां राहत नहीं, बल्कि बेसहारा लोगों के लिए ‘जिंदा भट्टी’ हैं. धवल दर्जी और उनकी संस्था ‘ट्रू होप फाउंडेशन’ (True Hope Foundation) ने यहां पारंपरिक ढर्रे को ठुकराते हुए 100 ‘हीट-रेसिस्टेंट’ (ताप-रोधी) शेल्टर्स रातों-रात खड़े कर दिए. यह केवल मदद नहीं थी, बल्कि जोधपुर का वह ‘स्मार्ट मॉडल’ था, जिसने लखनऊ के बेघरों को लू और गर्मी से फौलादी सुरक्षा दी.
क्यों खास है यह ‘जोधपुर मॉडल’?
- मरुधरा की तकनीक: जोधपुर के धवल ने जिन 10×20 फीट के शेल्टर्स का निर्माण किया, वे सूरज की किरणों को रिफ्लेक्ट कर देते हैं. अंदर का तापमान बाहर की तुलना में 5 से 8 डिग्री तक कम रहता है.
- डिजास्टर हीरो का एक्शन: हाल ही में ‘डिजास्टर मैनेजमेंट हीरो अवार्ड’ से नवाजे गए धवल दर्जी ने यह साबित कर दिया कि मारवाड़ का ज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि आपदा के समय जान बचाने के काम आता है.
- इंसानियत का ‘सेतु’: जब लखनऊ की बस्तियों में धमाके हो रहे थे और 10 किमी दूर से धुएं का गुबार दिख रहा था, तब राजस्थान की संवेदनाओं ने वहां पहुंचकर सिसकियों को मुस्कुराहट में बदल दिया.
‘राजस्थान से आया फरिश्ता’
विकास नगर की उस जलती हुई बस्ती में आज जोधपुर के इन युवाओं की बदौलत ‘उम्मीद की सफेद चादर’ बिछी हुई है. स्थानीय बुजुर्गों और महिलाओं की आंखों में धवल दर्जी के लिए जो दुआएं हैं, वह राजस्थान के हर नागरिक के लिए गौरव का विषय है.
धवल दर्जी का कहना है कि जब हम जोधपुर की गर्मी को हरा सकते हैं, तो लखनऊ के बेघरों को क्यों नहीं बचा सकते? हमारा मकसद सिर्फ राहत सामग्री बांटना नहीं, बल्कि राजस्थान की उस संस्कृति को निभाना था जो कहती है कि ‘परहित सरिस धरम नहिं भाई’.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें