विधानसभा चुनाव से पहले दो फाड़ हुई सपा? मीटिंग-पोस्टर से गायब सांसद गुस्से में
Uttar Pradesh SP Drift: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों की सियासी बिसात बिछने के साथ ही विपक्षी खेमे से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है. समाजवादियों के मजबूत गढ़ मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर चल रही अंदरूनी रंजिश और वर्चस्व की जंग अब पोस्टर और होर्डिंग्स के जरिए खुलेआम दिखने लगी है. मुरादाबाद में अमजद पठान द्वारा आयोजित PDA सद्भावना सम्मेलन के मंच और मुख्य बैनरों से नदारद मुरादाबाद की वर्तमान सपा सांसद रुचि वीरा काफी नराज दिख रही हैं. पोस्टर विवाद के बाद सांसद रुचि वीरा ने न केवल इस बड़े कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बनाई, बल्कि मीडिया के सामने आकर अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.
सपा सांसद रुचि वीरा ने बेहद कड़े और आक्रामक लहजे में इस पूरे वाकये को एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है. उन्होंने एक विशेष साक्षात्कार में सीधे तौर पर स्थानीय गुटबाजी पर प्रहार करते हुए कहा-
सांसद रुचि वीरा बोली, ‘मुझे आज के इस मुरादाबाद वाले PDA कार्यक्रम की कोई आधिकारिक जानकारी ही नहीं दी गई. कौन इसके ऑर्गनाइजर हैं, कौन मुख्य अतिथि हैं, मुझे कुछ नहीं पता. मुरादाबाद बहुत महत्वपूर्ण सीट है. जब पार्टी के एक सिटिंग सांसद को इस तरह से नजरअंदाज किया जा सकता है, तो ये लोग आम जनता को क्या तवज्जो देंगे? हमारी पार्टी में एक-दो नेता ऐसे हैं जो माहौल को जानबूझकर खराब कर रहे हैं और सीधे तौर पर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.’
ओछी राजनीति कर रहे हैं स्थानीय लोग
रूचि वीरा ने साफ किया कि वे इस पूरे अपमानजनक व्यवहार और स्थानीय गुटबाजी से राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को विस्तार से अवगत कराएंगी. उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में जब सबको मिलकर साथ चलने की जरूरत है, तब कुछ स्थानीय नेता ‘सांसद का फोटो मत लगाओ, उन्हें मत बुलाओ’ जैसी ओछी और आत्मघाती राजनीति कर रहे हैं, जो पार्टी के कैडर को खोखला कर रही है.
क्या अंदर से टूट रही है सपा?
मुरादाबाद का यह ताजा संकट हूबहू पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उस अंदरूनी संकट जैसा नजर आता है, जहां अक्सर चुनावों से ठीक पहले पुराने बनाम नए नेताओं के बीच पोस्टर वॉर और समानांतर बैठकें शुरू हो जाती हैं. टीएमसी में जिस तरह स्थानीय छत्रप एक-दूसरे का पत्ता साफ करने के लिए शीर्ष नेतृत्व के करीबी होने का नाटक करते हुए अपने ही प्रतिद्वंद्वियों को पोस्टरों से गायब कर देते हैं, ठीक वही बीमारी अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को अपनी गिरफ्त में लेती दिख रही है.
दो धड़ में बंट गई सपा?
मुरादाबाद के इस PDA सम्मेलन के बैनरों में अखिलेश यादव, आजम खान और पूर्व सांसद एसटी हसन के चेहरे तो प्रमुखता से चमकाए गए, लेकिन वर्तमान सिटिंग सांसद को पूरी तरह किनारे लगा दिया गया. यह साफ संकेत है कि पार्टी के भीतर आगामी विधानसभा टिकट वितरण और स्थानीय वर्चस्व को लेकर दो मजबूत और समानांतर धड़े बन चुके हैं. यदि शीर्ष नेतृत्व ने समय रहते इस आंतरिक कलह पर नकेल नहीं कसी, तो चुनाव के मुहाने पर खड़ी सपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि भीतरघात की यह चिंगारी पूरे पश्चिमी यूपी के चुनावी समीकरणों को बिगाड़ सकती है.
मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के भीतर ताजा विवाद किस कार्यक्रम के पोस्टरों को लेकर शुरू हुआ है?
यह विवाद मुरादाबाद में आयोजित ‘PDA सद्भावना सम्मेलन’ के मुख्य पोस्टरों और बैनरों से वर्तमान सपा सांसद रुचि वीरा की फोटो और नाम गायब होने को लेकर शुरू हुआ है.
अपने पोस्टर बहिष्कार पर मुरादाबाद की सपा सांसद रुचि वीरा ने स्थानीय नेताओं पर क्या आरोप लगाया है?
सांसद रुचि वीरा ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं दी गई और पार्टी के 1-2 स्थानीय नेता जानबूझकर ओछी राजनीति कर माहौल खराब कर रहे हैं और पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं.