रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच मजार! स्टेशन चौड़ीकरण रोकने के लिए बुलाई गई भीड़

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रेलवे ट्रैक के बीचों-बीच मजार! स्टेशन चौड़ीकरण रोकने के लिए बुलाई गई भीड़


फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों और विभागीय परिसरों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है. इसी बीच फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के अंतर्गत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन का कायाकल्प और रेलवे लाइनों के चौड़ीकरण का कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर चल रहा है. इसी विकास कार्य के दौरान रेलवे विभाग के सामने उस समय भारी संकट खड़ा हो गया, जब पटरियों के ठीक बीचों-बीच बनी एक मज़ार नए ट्रैक बिछाने और प्लेटफॉर्म के विस्तार में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर सामने आई. इस मजार के ध्वस्तीकरण को लेकर स्टेशन परिसर में भारी हंगामा और तनाव की स्थिति पैदा हो गई है.

अपने ही दो कर्मचारियों ने बुलाई भीड़

ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, जब रेलवे के तकनीकी अधिकारियों और गैंगमैन की टीम ने पटरियों के बीच में बाधक बन रहे मजार के हिस्से और अवैध अतिक्रमण को हटाने का विधिक प्रयास किया, तो रेलवे विभाग के भीतर ही काम करने वाले दो मुस्लिम कर्मचारियों ने इस पूरी प्रक्रिया का कड़ा विरोध शुरू कर दिया.

आरोप है कि इन दोनों रेल कर्मचारियों ने न केवल सरकारी काम में अड़ंगा डाला, बल्कि मजार को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय स्तर पर संदेश भेजकर विशेष समुदाय की भारी भीड़ को रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर बुला लिया. अचानक जुटी इस भीड़ के विरोध प्रदर्शन और हंगामे के चलते मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने लगी, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से रेलवे प्रशासन को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा और अतिक्रमण हटाओ अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा.

मजार को हटाया जाएगा- सांसद

रेलवे स्टेशन पर हुए इस भारी हंगामे और आंतरिक मिलीभगत की खबर जैसे ही राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों तक पहुँची, तो स्थानीय सांसद मुकेश राजपूत ने इस पर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया. सांसद मुकेश राजपूत ने आधिकारिक रूप से कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि अमृत योजना के तहत फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन का आधुनिक होना पूरे क्षेत्र के व्यापार और यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है.

उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, “रेलवे की बेशकीमती सरकारी जमीन पर किया गया कोई भी अवैध कब्जा या अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. रेलवे लाइन के चौड़ीकरण में जो भी मजार बाधक बन रही है, उसे प्रशासन द्वारा कानून सम्मत तरीके से हर हाल में वहाँ से हटाया जाएगा.” सांसद ने साफ किया कि विकास के राष्ट्रीय कार्यों में किसी भी प्रकार का भीड़ तंत्र या तुष्टिकरण आड़े नहीं आने दिया जाएगा.

अमृत योजना के तहत चल रहा है कायाकल्प का कार्य

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अरबों रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है, जिसके तहत नए ट्रैक बिछाने और सिग्नलों को हाई-टेक करने का काम चल रहा है. फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन के मुख्य यार्ड और लाइनों के बीच मजार का यह विवाद अब पूरी तरह से प्रशासनिक और कानूनी दायरे में आ चुका है.

रेलवे के बड़े अधिकारियों ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए सरकारी कार्य में बाधा डालने और भीड़ जुटाने वाले अपने दोनों मुस्लिम कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है और उन पर निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के संकेत दिए हैं. फिलहाल, स्टेशन परिसर और मजार के आसपास किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस की मुस्तैदी को काफी बढ़ा दिया गया है.

फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन पर चल रहे किस मुख्य सरकारी कार्य में मजार बाधक बन रही है?
केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत रेलवे स्टेशन पर चल रहे रेलवे लाइनों के चौड़ीकरण और यार्ड आधुनिकीकरण के कार्य में यह मजार बाधा बन रही है.

यह विवादित मजार रेलवे स्टेशन परिसर में भौगोलिक रूप से कहाँ पर स्थित है?
यह विवादित मजार फर्रुखाबाद रेलवे स्टेशन परिसर के भीतर रेलवे की सरकारी जमीन पर सीधे तौर पर रेलवे लाइनों के बिल्कुल बीचों-बीच बनी हुई है.



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