वृंदावन में गेहूं के 9 दानों पर जमीन से 3 इंच ऊपर टिकी है तीस टन की प्रतिमा,जानें
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Mathura news: रामताल रोड स्थित एक ऐसा मंदिर जहां आज भी चमत्कार होते हुए आपको दिखाई देंगे इस मंदिर में जो प्रतिमा रखी हुई है. वह जमीन से करीब दूर से 3 इंच ऊपर है. इस प्रतिमा को हवा में लटकता हुआ. आप देखेंगे इस प्रतिमा में ना तो कोई सरिया लगी हुई है और नाही कुछ इस सपोर्ट के लिए साधन. यह प्रतिमा केवल गेहूं के 9 दोनों पर टिकी हुई है, जो अपने आप में चमत्कारिक है.
मथुरा: कान्हा की नगरी वृन्दावन को उनकी क्रीड़ा स्थली कहा जाता है. जहां आपको अनेकों चमत्कार देखने को मिलेंगे. यहां एक ऐसी प्रतिमा देखने को मिलेगी, जो जमीन से करीब 3 इंच ऊपर है. ये प्रतिमा गेहूं के नौ दानों पर टिकी हुई है. इस प्रतिमा का वजन करीब तीस टन है. इस चमत्कार के सामने विज्ञान भी फेल होता हुआ नजर आ रहा है. क्योंकि इस प्रतिमा के नीचे कुछ भी नहीं है. जमीन से कई इंच ऊपर उठी हुई है. इस प्रतिमा को देखकर आता है, वह एक चमत्कार ही मानता है.
विज्ञान भी नहीं समझ पा रहा चमत्कार
विज्ञान ने भले ही तरक्की कर ली हो और विज्ञान भले ही हर उसे चीज का तोड़ निकलता हो जिसे असंभव माना जाता है. चंद्रमा तक विज्ञान पहुंच गया. ऐसी ऐसी योजनाएं विज्ञान के द्वारा बनाई गई, जो असंभव थीं. लेकिन आज भी उसे विज्ञान को पछाड़ती हुई ऐसी चमत्कारी घटनाएं सामने आती है, जो आज भी लोगों के अंदर उस विश्वास को बनाए हुए हैं. द्वापर युग हो, त्रेता युग हो या सतयुग हो. इन सभी युगों में चमत्कारी स्थान आपको देखने को मिलेंगे, तो वहीं कलयुग में भी अब वह स्थान और भी मान्य होते चले जा रहे हैं. वृंदावन की सीमा में लगने वाला एक ऐसा मंदिर जहां चमत्कारों की भरमार है. इस चमत्कार से लोग प्रभावित होकर उसे चमत्कार को नमस्कार कर रहे हैं.
रामताल रोड पर स्थित है प्रतिमा
रामताल रोड स्थित एक ऐसा मंदिर जहां आज भी चमत्कार होते हुए आपको दिखाई देंगे इस मंदिर में जो प्रतिमा रखी हुई है. वह जमीन से करीब दूर से 3 इंच ऊपर है. इस प्रतिमा को हवा में लटकता हुआ. आप देखेंगे इस प्रतिमा में ना तो कोई सरिया लगी हुई है और नाही कुछ इस सपोर्ट के लिए साधन. यह प्रतिमा केवल गेहूं के 9 दोनों पर टिकी हुई है, जो अपने आप में चमत्कारिक है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए आश्रम के महंत नेम सिंह बाबा ने बताया कि बड़े महाराज की प्रतिमा है. 30 टन इस प्रतिमा का भजन है. नेम सिंह बाबा ने यह भी बताया कि बांके बिहारी जी की कृपा है. समाधि स्थल का जब से निर्माण हुआ उसके बाद प्राण प्रतिष्ठा हुई तभी से यह प्रतिमा हवा में लटकी हुई है. कोई सपोर्ट इस प्रतिमा में नहीं है. सच्चे मन से जो भी यहां आकर अपनी मनौती सामने रखता है. उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …
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