व्यक्ति से दुश्मनी है, शिक्षा से दुश्मनी तो मत करो.. कार्रवाई पर भड़के छात्र
Jauhar University Rampur: उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उनके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया है और प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया गया है. साथ ही, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यूनिवर्सिटी परिसर से गुजरने वाली करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क को आम लोगों के लिए खोलते हुए उसे सार्वजनिक मार्ग घोषित कर दिया है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र अपने भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं.
सिर्फ दो भवनों का नक्शा स्वीकृत, बाकी अवैध: DM
जिलाधिकारी एवं आरडीए के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी के मुताबिक, जांच में पाया गया कि विश्वविद्यालय परिसर के कुल 40 भवनों में से केवल दो भवनों के नक्शे ही तत्कालीन जिला पंचायत से स्वीकृत थे. मेडिकल कॉलेज और एकेडमिक ब्लॉक को छोड़कर बाकी 38 भवन बिना स्वीकृत नक्शे के तैयार किए गए. इसी आधार पर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया है. प्रबंधन को पहले नोटिस दिया गया था, उनसे जवाब मांगा गया और पूरी कानूनी सुनवाई के बाद ही यह फैसला लिया गया है.
परिसर के भीतर की सड़क अब आम जनता के लिए खुली
इसी दौरान लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाली सड़क को भी आम जनता के लिए खोल दिया है. विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर बाकायदा बोर्ड लगाकर लिखा गया है कि ‘यह आम रास्ता है’. यह सड़क समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016-17 में लगभग 17.16 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई थी. वर्ष 2019 से इस मार्ग पर आम लोगों का आवागमन बंद था, जिसे अब प्रशासनिक आदेश के बाद फिर से सार्वजनिक कर दिया गया है.
छात्रों को सता रही है भविष्य और डिग्री की चिंता
वही, दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी में बी-फार्मा अंतिम वर्ष के छात्र जुनैद अली कहते हैं कि उनका फाइनल ईयर चल रहा है और अभी तक उन्हें डिग्री भी नहीं मिली है. उनका कहना है कि इस कार्रवाई से उनकी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और इस समय सबसे बड़ी चिंता उन्हें अपने परिवार की है.
जुनैद भावुक होते हुए कहते हैं, ‘हम जानते हैं कि हमारे मां-बाप ने कितनी मेहनत करके हमें यहां तक पढ़ाया है. जब उन्हें पता चलेगा कि यूनिवर्सिटी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो रही है, तो उन पर क्या बीतेगी? यह शिक्षा का मंदिर है, इसे किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ा जाना चाहिए. अगर यह टूट गया तो हम कहां जाएंगे और अपना भविष्य कैसे बनाएंगे?’
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे कई छात्र हैं जिनके पिता रोजाना करीब 600 रुपये मजदूरी करते हैं और उसी कमाई में से बच्चों की फीस के लिए पैसे बचाते हैं. हमारे हाथ से कलम छीनी जा रही है, हम अपने हक के लिए लड़ेंगे और इस यूनिवर्सिटी को टूटने नहीं देंगे.
‘प्रशासनिक दुश्मनी का शिकार न हो छात्रों की तालीम’
बी-फार्मा के ही एक अन्य छात्र अरशद अली ने सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को नहीं तोड़ा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, यहां पढ़ाई की बेहतरीन सुविधाएं हैं और सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए. वहीं, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी के छात्र सचिन का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय पर यह कार्रवाई होती है, तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों के भविष्य का होगा. उन्होंने कहा कि हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई अधर में लटक जाएगी, इसलिए सरकार को छात्रों के हित को सर्वोपरि रखकर फैसला लेना चाहिए.
छात्र मुनादिर पाशा नदवी का कहना है कि यदि कोई कानूनी विवाद है, तो उसका समाधान कानून के दायरे में ही निकाला जाना चाहिए. ध्वस्तीकरण ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए. उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर किसी एक व्यक्ति से दुश्मनी, तालीम से दुश्मनी बन जाए तो इससे बड़ा अन्याय कुछ नहीं हो सकता. शिक्षा से दुश्मनी नहीं होनी चाहिए. यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने का मतलब बच्चों के भविष्य पर बुलडोजर चलाना है. अगर यह जगह नहीं रहेगी तो छात्र कहां पढ़ेंगे?
कानूनी कार्रवाई बनाम छात्रों का भविष्य
फिलहाल, जौहर यूनिवर्सिटी का यह पूरा मामला कानूनी कार्रवाई, प्रशासनिक फैसलों और छात्रों के भविष्य के बीच एक बड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है. एक ओर जहां प्रशासन अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर हजारों छात्र अपनी मेहनत, पढ़ाई और धुंधले होते भविष्य को लेकर गहरे संकट में दिखाई दे रहे हैं.