शिव नगरी आगरा: पश्चिमपुरी मंदिर में सावन की धूम, लगती है किलोमीटर लंबी लाइन

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शिव नगरी आगरा: पश्चिमपुरी मंदिर में सावन की धूम, लगती है किलोमीटर लंबी लाइन


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Agra Shiv Mandir: ताजनगरी आगरा सिर्फ अपनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत के लिए भी पहचानी जाती है. चारों दिशाओं में स्थापित पौराणिक शिव मंदिरों के कारण कई लोग इसे ‘शिव नगरी’ भी कहते हैं. सावन के पवित्र महीने में यहां का माहौल पूरी तरह शिवमय हो जाता है. विशेष रूप से पश्चिमपुरी क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और चमत्कारी मान्यताओं का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां केवल एक लोटा जल अर्पित करने मात्र से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों का कल्याण कर देते हैं.

Agra Shiv Mandir: उत्तर प्रदेश के आगरा में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं. आगरा की चारों दिशाओं में प्राचीन शिव मंदिर स्थित हैं, जिनका इतिहास कई सालों पुराना है. कई लोग आगरा को शिव नगरी भी कहते हैं. सावन के महीने में आगरा में मेले जैसा उत्सव रहता है. आगरा के सभी प्राचीन मंदिरों में भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है. आज हम आपको आगरा के पश्चिमपुरी क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. दरअसल, पश्चिमपुरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर अपनी धार्मिक आस्था और चमत्कारी मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.

मनोकामना पूर्ति और रुद्राभिषेक की परंपरा
मान्यता है कि सावन के पवित्र महीने में यहां सुबह से देर रात तक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध और पुष्प लेकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजन करते हैं. मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठता है. यहां के पुजारी बताते हैं कि श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से बाबा भोलेनाथ की आराधना करने वाले किसी भी भक्त को वे खाली हाथ नहीं लौटाते. यहां आने वाले लोग अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, संतान, रोजगार और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की हर उचित इच्छा पूरी करते हैं, इसलिए सावन में इस प्राचीन मंदिर का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

ब्रह्ममुहूर्त से दर्शन और किलोमीटर लंबी लाइनें
आगरा के पश्चिमपुरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित देवेंद्र पुजारी ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर का महत्व सावन के महीने में काफी अधिक बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि सावन के पवित्र महीने में इस प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही भक्त जल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद और पुष्प लेकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.

विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर महामृत्युंजय मंत्र और ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया जाता है. भक्त भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हैं. सावन के दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और शिवमय वातावरण से सराबोर रहता है. उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त पूरे सावन के महीने में यह मंदिर भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता है. उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को तो यहाँ कई किलोमीटर लंबी लाइन तक लग जाती है.

मात्र जल की धारा से प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ
आगरा के पश्चिमपुरी स्थित प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित देवेंद्र पुजारी ने बताया कि बाबा भोलेनाथ इतने भोले हैं कि यदि कोई भक्त उन्हें सिर्फ जल की धारा ही चढ़ा देता है, तो उसी से वे इतने प्रसन्न हो जाते हैं कि भक्त का कल्याण हो जाता है. उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ को जल की धारा अत्यंत प्रिय मानी जाती है. इसलिए सावन माह में शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालु गंगाजल, दूध और शुद्ध जल से भगवान शिव का अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करते हैं. उनका कहना है कि सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

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Rahul Goel

Rahul Goyal is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations …

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