सहारनपुर की बेटी स्वाति ने पिता की मुश्किलों को हौसलों में बदला, घर से ही किया ऐसा काम, हर कोई हो गया कायल

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सहारनपुर की बेटी स्वाति ने पिता की मुश्किलों को हौसलों में बदला, घर से ही किया ऐसा काम, हर कोई हो गया कायल


सहारनपुर: सहारनपुर की रहने वाली स्वाति की कहानी न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि यह साबित करती है कि बेटियां भी हर मोर्चे पर बेटों से कम नहीं होतीं. जहां आमतौर पर लड़के परिवार की जिम्मेदारी उठाते हैं, वहीं स्वाति ने मुश्किल हालात में अपने परिवार को संभालने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली.

पांच साल पहले स्वाति के पिता बिजलीघर में काम के दौरान करंट लगने से गंभीर रूप से झुलस गए थे. उस हादसे के बाद घर की आर्थिक स्थिति डगमगा गई. परिवार में कमाने वाला कोई नहीं था और यही समय था जब स्वाति ने खुद को साबित करने का फैसला किया.

कान्हा जी से प्रेम बना स्वावलंबन का माध्यम
स्वाति को बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण यानी कान्हा जी से विशेष लगाव रहा है. तीन साल पहले जन्माष्टमी के अवसर पर जब वह बाजार में कान्हा जी की ड्रेस खरीदने गईं, तो उन्हें कोई ड्रेस पसंद नहीं आई. तभी उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न खुद ही कान्हा जी की एक सुंदर ड्रेस बनाई जाए. घर आकर उन्होंने पहली ड्रेस खुद तैयार की और जब लोगों ने उसकी तारीफ की, तो स्वाति का आत्मविश्वास और बढ़ गया. उन्होंने तय कर लिया कि अब वह कान्हा जी की ड्रेस बनाकर बेचना शुरू करेंगी ताकि घर की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके.

तीन साल में बना लिया अलग पहचान
स्वाति पिछले तीन वर्षों में 2000 से ज्यादा ड्रेस बना चुकी हैं. वह एक दिन में 15 से 20 ड्रेस तैयार कर लेती हैं, जिनमें जरकन, मोती, नग, लेस और कई तरह के हाथों के काम होते हैं. उनकी बनाई ड्रेस 50 रुपये से शुरू होकर 1000 तक बिकती हैं. स्वाति कान्हा जी की ड्रेस के अलावा अब खाटू श्याम जी की ड्रेस और पगड़ियां भी तैयार करती हैं. उनकी बनाई ड्रेस इतनी खूबसूरत होती हैं कि जो एक बार खरीदता है, वह बार-बार वहीं से खरीदारी करता है.

घर से ही चला रही कारोबार
ड्रेस तैयार करने के साथ-साथ स्वाति अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं. वह इस समय सरकारी आईटीआई से इंग्लिश स्टेनो का कोर्स कर रही हैं. पढ़ाई और काम के बीच संतुलन बनाए रखते हुए वह अपने परिवार का सहारा बनी हुई हैं.

एक नई सोच, एक नई दिशा
स्वाति की यह कहानी बताती है कि किसी भी कठिन परिस्थिति को अगर साहस, हुनर और लगन से लिया जाए, तो वह अवसर में बदल सकती है. स्वाति न सिर्फ अपने पिता का सहारा बनीं, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए मिसाल हैं, जो विपरीत हालात में भी हार नहीं मानतीं. आज स्वाति का सपना है कि वह आगे चलकर अपनी एक खुद की बुटीक खोलें, जहां से और भी तरह की भगवान की पोशाकें तैयार कर लोगों तक पहुंचा सकें.



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