सिर्फ दशाश्वमेध नहीं! वाराणसी के इन 5 घाटों पर भी होती है भव्य गंगा आरती, देखे
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Varanasi Famous Ganga Aarti: धर्म नगरी काशी की पहचान घाट, गली और मंदिरों से है. यहां काशी विश्वनाथ के दर्शन के साथ भव्य गंगा आरती के दीदार के लिए देश दुनिया से श्रद्धालु और पर्यटक आतें है. वैसे तो वाराणसी के 84 घाटों में से दर्जनों घाट पर गंगा आरती होती है. लेकिन इनमें कुछ गंगा आरती विशेष महत्व रखती है. आइये जानते है इसके बारे में…
वाराणसी के दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली नित्य संध्या गंगा आरती बेहद खास है. यह आरती तीन दशक से ज्यादा समय से निरंतर चलती चली आ रही है. इस गंगा आरती में आध्यात्मिकता का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. नित्य संध्या 5 अर्चक पूरे वैदिक विधि विधान से इस आरती को करतें है. आरती से पहले मां गंगा का विशेष पूजन भी किया जाता है.

हाल के दिनों में काशी विश्वनाथ धाम के गंग द्वार पर भी मंदिर न्यास की ओर से गंगा आरती की शुरुआत हुई है. यह गंगा आरती भी काफी भव्य स्वरूप में की जा रही है. इसे निहारने के लिए भी हर दिन हजारों श्रद्धालु ललिता घाट पहुंच रहें हैं. आरती का भव्य स्वरूप भक्तों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इस नए गंगा आरती में पुरातन स्वरूप की झलक दिखाई दें रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस गंगा आरती में शामिल हो चुकें है. इसके अलावा जापान के पीएम शिंजो आबे भी यहां गंगा आरती देख मंत्रमुग्ध हुए है. इतना ही नहीं मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार ने भी इस घाट पर आरती को निहारा है. इन सब के अलावा कई केंद्रीय मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और ढेरों बॉलीवुड के सुपर स्टार यहां आ चुकें है.
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इन सब के अलावा दुनिया के सबसे बड़े घाट पर भी नित्य संध्या आरती होती है. नमो घाट पर होने वाली गंगा आरती श्री काशी विश्वनाथ न्यास की ओर से कराई जाती है. इस आरती का भव्यतम स्वरूप काफी मनमोहक होता है. यहां भी शाम चढ़ने के साथ भक्तों की भारी भीड़ होती है.

दशाश्वमेघ घाट के बगल में राजेंद्र प्रसाद घाट पर भी नित्य गंगा आरती की जाती है. यहां काशी विश्वनाथ के सप्तऋषि आरती के तर्ज पर 7 अर्चकों द्वारा नित्य संध्या आरती होती है. गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाले इस हर दिन हजारों श्रद्धालु शामिल होते है. विशेष तिथियों में इनकी संख्या दो गुनी से भी ज्यादा हो जाती है. गंगा तट से लेकर नावों तक हर दिन हजारों लोग इस आरती को निहारतें है.

इसके अलावा वाराणसी के अस्सी घाट पर भी गंगा आरती होती है. जय मां गंगा सेवा समिति द्वारा होने वाली इस भव्य आरती में भक्तों को मां गंगा के विशाल स्वरूप के दर्शन भी होते है. 7 अर्चकों द्वारा होने वाले इस आरती के समय पूरा घाट भक्तों से भरा होता है. घण्टे घड़ियाल की आवाज और भजन के गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय होता है.

बताते चलें की बनारस में गंगा आरती की शुरुआत किशोरी रमन दुबे उर्फ बाबू महाराज ने की थी. 90 के दशक में वो हरिद्वार गए थे. वहां गंगा आरती देख उन्होंने काशी के दशाश्वमेघ घाट पर भी गंगा आरती का संकल्प लिया. उस समय उन्होंने अकेले ही एक आरती से इसकी नींव रखी थी. उसके बाद उन्होंने इसे नियमित रूप दिया.

गंगोत्री सेवा समिति द्वारा होने वाली मां गंगा की भव्य आरती बेहद अद्भुत होती है. यहां आरती के दौरान भक्तों को मां गंगा के अष्टधातु की प्रतिमा के दर्शन भी होते है. फिर उन्हें नारियल की बलि भी चढ़ाई जाती है. पारंपरिक स्वरूप में होने वाले इस आरती को देखने के लिए देश दुनिया से लोग यहां आतें है.