हाउसवाइफ से बनीं एंटरप्रेन्योर, गोरखपुर की महिलाएं गोबर से तैयार कर रहीं ऑर्गेनिक प्रोडक्ट
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गोबर से तैयार होने वाले इन उत्पादों की कीमत भी काफी कम रखी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हें खरीद सकें. अगरबत्ती और हवन कप जैसे प्रोडक्ट 5 से 10 रुपये तक में बिक रहे हैं. सस्ते होने के बावजूद इनकी मांग अच्छी है क्योंकि लोग अब केमिकल वाले उत्पादों की जगह ऑर्गेनिक चीजों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
गोरखपुर: गोरखपुर के गुलरिया क्षेत्र की कई महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं. कभी सिर्फ घर तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं अब अपने हुनर और मेहनत के दम पर घर बैठे कारोबार कर रही हैं. खास बात यह है कि इन महिलाओं ने अपने बिजनेस की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से की, लेकिन आज उनके बनाए ऑर्गेनिक प्रोडक्ट बाजार में पसंद किए जा रहे हैं.
ये महिलाएं गोबर से अगरबत्ती, हवन कप, दीये और कई धार्मिक उपयोग के प्रोडक्ट तैयार करती हैं. पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे इन प्रोडक्ट्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है. स्थानीय बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इनकी अच्छी बिक्री हो रही है.
महिलाओं की सहारा बनी संगीता
इस पूरे काम में संगीता पांडे महिलाओं की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं. संगीता बताती हैं कि उन्होंने अपनी छोटी फैक्ट्री और कारोबार के जरिए इलाके की महिलाओं को रोजगार देने की कोशिश शुरू की. शुरुआत में कई महिलाओं को यह काम सीखने में दिक्कत हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इसे समझा और आज बेहतर तरीके से प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं. संगीता का कहना है कि कई बार महिलाओं के प्रोडक्ट बाजार में आसानी से नहीं बिक पाते थे. ऐसे में उन्होंने खुद आगे आकर इन सामानों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाना शुरू किया. अब सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों की मदद से इन महिलाओं के प्रोडक्ट दूसरे शहरों तक भी पहुंच रहे हैं.
कम लागत में अच्छा मुनाफा
गोबर से तैयार होने वाले इन उत्पादों की कीमत भी काफी कम रखी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन्हें खरीद सकें. अगरबत्ती और हवन कप जैसे प्रोडक्ट 5 से 10 रुपये तक में बिक रहे हैं. सस्ते होने के बावजूद इनकी मांग अच्छी है क्योंकि लोग अब केमिकल वाले उत्पादों की जगह ऑर्गेनिक चीजों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. गुलरिया की महिलाओं का यह प्रयास अब दूसरे गांवों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है. घर के काम के साथ-साथ ये महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन और सरकार की ओर से थोड़ा और सहयोग मिले तो यह छोटा कारोबार आगे चलकर बड़े स्तर का उद्योग बन सकता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें