अंग्रेजों ने बाबा जाहरवीर के मेले पर लगाई रोक, चमत्कार के आगे टेकने पड़े घुटने
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अंग्रेज कलेक्टर ने एक दिन का भरा जाने वाला यह मेल बंद करने का आदेश दिया और उसी रात हर स्थान पर उनको सांपों ने परेशान करना शुरू किया. अपनी जान बचाकर अंग्रेज कलेक्टर बाबा के दरबार पहुंचे. वहां पर मत्था टेक कर अ…और पढ़ें
अंग्रेज कलेक्टर ने एक दिन का भरने वाला यह मेल बंद करने का आदेश दिया और उसी रात हर स्थान पर उनको सांपों ने परेशान करना शुरू किया. अपनी जान बचाकर अंग्रेज कलेक्टर बाबा जाहरवीर के दरबार पहुंचे और वहां पर मत्था टेक कर अपनी गलतियों को माना तब जाकर बाबा ने उनको क्षमा किया उसके बाद अंग्रेज कलेक्टर ने बाबा की शक्तियों के चमत्कार को देख कर एक दिन का भरने वाला सहारनपुर का मेला 3 दिन का कर दिया और आज तक यह तीन दिन का भरता चला आ रहा है.
यह मेल लगभग 1860 में ब्रिटिश शासन काल था. उस समय जो यहां के कलेक्टर थे. उन्होंने इस मेले को बंद कराने का प्रयास किया था. यह मेल एक दिन का भरा करता था. जब इस मेले को बंद किया गया तो बाबा ने अपना चमत्कार दिखाया अपनी शक्तियां दिखाई. उस समय के डीएम जी ने कलेक्टर कहा जाता था. वह जब मेल बंद कराने के बाद सोने के लिए गए तो उनके बिस्तर में सांप, छत पर देखा तो छत पर भी सांप, खाना खाने बैठे तो उसमें भी सांप तब उन्हें एहसास हुआ कि जाहरवीर महाराज एक बड़ी शक्ति है.
इस बड़े मेले पर अंग्रेजों ने लगाई थी लगाम
अगले ही दिन अपने परिवार के साथ बाबा जाहरवीर के स्थान पर माथा टेका, प्रसाद चढ़ाया और समय याचना की. फिर उसके बाद जो एक दिवसीय मेला था. उसको बढाकर उन्होंने तीन दिन का कर दिया. जब से ही यह मेला आज तक तीन दिन का भरता चला आ रहा है. नवमी की रात 12:00 से म्हाड़ी पर प्रसाद चढ़ाना शुरू हो जाता है फिर दशमी और एकादशी को छड़िया दो दिन, दो रात वहाँ पर रहती है. तीसरे दिन सुबह 10:00 छड़िया वापस अपने स्थान पर प्रस्थान करने के लिए चल देती है.