अब ना कोई देरी, ना हेराफेरी! घर बैठे एक क्लिक में मिलेगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट..
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Saharanpur News: सहारनपुर में पोस्टमार्टम और मेडिकोलीगल रिपोर्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगी. “मेडिलेपार” सॉफ्टवेयर से यह प्रक्रिया डिजिटल हो गई है, जिससे छेड़छाड़ और देरी की शिकायतें खत्म होंगी.
हाइलाइट्स
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध.
- मेडिलेपार सॉफ्टवेयर से प्रक्रिया डिजिटल हुई.
- रिपोर्ट में छेड़छाड़ और देरी की शिकायतें खत्म.
देहरादून रोड स्थित पोस्टमार्टम हाउस में पूरे जिले से सड़क हादसों और अन्य मामलों में मृत पाए गए लोगों के शव पोस्टमार्टम के लिए लाए जाते हैं. पहले इन रिपोर्ट्स को सिर्फ हार्ड कॉपी के रूप में तैयार किया जाता था, जिससे छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती थी. लेकिन अब “मेडिलेपार” (Medilepr) नामक सॉफ्टवेयर के ज़रिए यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है.
इस सॉफ्टवेयर में पोस्टमार्टम हाउस और जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों की पर्सनल आईडी बनाई गई है. डॉक्टर अपनी आईडी से लॉगिन करते हैं और फार्मासिस्ट व कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से हर शव की पूरी डिटेल ऑनलाइन फॉर्म में भरते हैं. फाइनल सबमिशन से पहले डॉक्टर के आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है. वही ओटीपी डालने के बाद रिपोर्ट सबमिट होती है, जिससे पूरी प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी बनती है.
कब से शुरू हुआ यह बदलाव?
देहरादून रोड स्थित पोस्टमार्टम हाउस में 17 मई से इस सॉफ्टवेयर के ज़रिए रिपोर्ट अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. अब तक 26 पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन की जा चुकी हैं. रिपोर्ट को सही तरीके से भरने और अपलोड करने के लिए डॉक्टरों को पहले प्रशिक्षण भी दिया गया था.
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. प्रवीण कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सरकार द्वारा विकसित इस डिजिटल सिस्टम से अब आम जनता को काफी सहूलियत मिल रही है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में एक्सीडेंट या मारपीट के केस आते थे, जिनमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मुकदमा दर्ज होता था. रिपोर्ट मिलने में पहले देरी होती थी, जिससे कानूनी प्रक्रिया अटक जाती थी. लेकिन अब यह रिपोर्ट मोबाइल पर घर बैठे उपलब्ध हो रही है.
मेडिकोलीगल रिपोर्ट भी ऑनलाइन
इस सॉफ्टवेयर के ज़रिए सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही नहीं, बल्कि मेडिकोलीगल रिपोर्ट भी अब ऑनलाइन ही दी जा रही है. सरकारी अस्पतालों में घायलों के मेडिकल की प्रक्रिया भी अब इसी सिस्टम के तहत अपडेट की जा रही है. इससे केस की निष्पक्ष जांच में भी मदद मिल रही है.